Toll Tax New Rules : राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब अगर किसी वाहन से जुड़ा टोल टैक्स बकाया है, तो उसका सीधा असर गाड़ी के जरूरी दस्तावेज़ों पर पड़ेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन करते हुए नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत टोल बकाया को अब वाहन से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं से जोड़ दिया गया है।
सरकार का साफ कहना है कि अगर हाईवे पर टोल भुगतान नहीं किया गया, तो वाहन मालिक को जरूरी सेवाओं से वंचित किया जाएगा। यह फैसला टोल वसूली व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लिया गया है, खासकर ऐसे समय में जब देश तेजी से बैरियर-फ्री टोल सिस्टम की ओर बढ़ रहा है।
NOC अब तभी मिलेगी जब टोल बकाया साफ होगा
नए नियमों के मुताबिक अगर कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी बेचने की योजना बना रहा है या एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन ट्रांसफर कराना चाहता है, तो उसे पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेनी होगी। लेकिन अब यह NOC तभी जारी की जाएगी जब वाहन से जुड़ा हर टोल भुगतान पूरी तरह साफ होगा।
अगर सिस्टम में यह दर्ज है कि वाहन ने किसी टोल प्लाजा पर भुगतान नहीं किया है, तो आरटीओ स्तर पर ही NOC की प्रक्रिया रोक दी जाएगी। बकाया चुकाने के बाद ही आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी।
फिटनेस सर्टिफिकेट भी टोल से जुड़ा
सिर्फ NOC ही नहीं, अब वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट भी सीधे टोल भुगतान से जोड़ दिया गया है। खासतौर पर पुराने और कमर्शियल वाहनों के लिए यह नियम और सख्त होगा। अगर किसी वाहन पर अनपेड यूजर फी दर्ज है, तो उसका फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं किया जाएगा।
मंत्रालय ने साफ किया है कि अनपेड यूजर फी का मतलब वह टोल राशि है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम ने रिकॉर्ड किया, लेकिन कानून के तहत उसका भुगतान नहीं हुआ।
कमर्शियल वाहनों के लिए कोई ढील नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ट्रक, बस और लॉजिस्टिक से जुड़े कमर्शियल वाहनों के मामले में किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। नेशनल परमिट लेने या उसे बनाए रखने के लिए अब यह जरूरी शर्त होगी कि वाहन पर किसी भी तरह का टोल बकाया न हो।
एक छोटा-सा लंबित टोल भुगतान भी पूरे ऑपरेशन को रोक सकता है, जिससे सीधे तौर पर कारोबार प्रभावित होगा।
फॉर्म 28 में बड़ा बदलाव
वाहन ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 28 में भी अहम बदलाव किए गए हैं। अब इस फॉर्म में वाहन मालिक को यह घोषणा करनी होगी कि उसके वाहन पर किसी भी टोल प्लाजा का कोई बकाया नहीं है।
पहले इस फॉर्म में टैक्स, चालान और कानूनी मामलों की जानकारी दी जाती थी, लेकिन अब टोल भुगतान को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। साथ ही फॉर्म 28 के कुछ हिस्सों को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान होगी।
क्यों लिया गया यह फैसला – एक नजरिया
सरकार का मानना है कि इन सख्त नियमों से न सिर्फ टोल चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि राजमार्गों पर लगने वाले जाम में भी कमी आएगी। डिजिटल टोल सिस्टम मजबूत होगा और ईमानदार वाहन चालकों को परेशानी नहीं होगी।
यह कदम आने वाले मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोल सिस्टम की तैयारी का हिस्सा है, जहां वाहन बिना रुके हाईवे से गुजरेंगे और टोल अपने आप डिजिटल तरीके से कट जाएगा।
जानें पूरा मामला
केंद्र सरकार ने टोल वसूली को सख्त और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब टोल न भरना सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि वाहन से जुड़े जरूरी दस्तावेज़ों पर सीधा असर डालने वाला मामला बन गया है। आने वाले समय में वाहन मालिकों को टोल भुगतान को लेकर ज्यादा सतर्क रहना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- टोल बकाया अब वाहन सेवाओं से सीधे जुड़ा
- बकाया होने पर NOC जारी नहीं होगी
- फिटनेस सर्टिफिकेट भी रिन्यू नहीं होगा
- कमर्शियल वाहनों पर नियम और सख्त








