India Textile Sector Growth : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार को देश के वस्त्र उद्योग (Textile Sector) को लेकर एक बेहद अहम और उत्साहजनक तस्वीर पेश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैसे यह सेक्टर अब केवल कपड़े बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में रोजगार और विकास का सबसे शक्तिशाली इंजन बन गया है।
भारत का टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जो कभी केवल पारंपरिक तौर-तरीकों के लिए जाना जाता था, आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्रीय वस्त्र मंत्री Giriraj Singh द्वारा लिखे गए एक विशेष लेख को साझा करते हुए बताया कि यह क्षेत्र अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ की असली पहचान बन चुका है। यह बदलाव केवल मशीनों या उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम भारतीय की जेब और रोजगार पर पड़ रहा है।
In this article, Union Minister Shri @girirajsinghbjp outlines the rise of India’s textile sector from a legacy industry to a powerful, job-creating, people-centric engine of growth, embodying the true spirit of Aatmanirbhar Bharat.
He highlights that PM MITRA Parks, PLI schemes… https://t.co/BEOPo3b1De
— PMO India (@PMOIndia) January 20, 2026
पारंपरिक उद्योग से ‘ग्रोथ इंजन’ तक का सफर
जिस तरह से भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, उसमें टेक्सटाइल सेक्टर की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि भारत का वस्त्र उद्योग अब अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलकर एक आधुनिक, तकनीक-आधारित और लोक-केंद्रित (people-centric) विकास के मॉडल के रूप में उभरा है। यह केवल कपड़ों का व्यापार नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार सृजन का एक सशक्त माध्यम बन गया है।
रोजगार की नई लहर: PM MITRA और PLI का कमाल
इस लेख में उन तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र किया गया है, जो इस बदलाव की नींव रख रहे हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है ‘पीएम मित्र पार्क’ (PM MITRA Parks) और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं यानी पीएलआई स्कीम्स (PLI Schemes)। ये योजनाएं केवल कागजी नहीं हैं, बल्कि धरातल पर रोजगार की अगली बड़ी लहर (Next Wave of Employment) पैदा कर रही हैं।
इसके साथ ही, नए मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements) ने भारतीय कपड़ों के लिए दुनिया के दरवाजे खोल दिए हैं। इसका मतलब है कि भारत में बना कपड़ा अब बिना किसी बाधा के विदेशी बाजारों में आसानी से पहुंच रहा है, जिससे विदेशी मुद्रा तो आ ही रही है, साथ ही यहां के बुनकरों और कामगारों को ज्यादा काम मिल रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की ‘सच्ची भावना’
यह पूरा बदलाव ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करता है। जब हम अपने देश में ही विश्वस्तरीय कपड़े बनाएंगे, अपनी तकनीक इस्तेमाल करेंगे और अपने ही लोगों को रोजगार देंगे, तो देश अपने आप सशक्त होगा। यह लेख बताता है कि टेक्सटाइल सेक्टर ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही नीति और नीयत हो, तो एक पारंपरिक उद्योग भी देश की ताकत बन सकता है।
विश्लेषण (Analysis):
वरिष्ठ संपादक के तौर पर इस घटनाक्रम को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि सरकार टेक्सटाइल सेक्टर को ‘कृषि के बाद दूसरे सबसे बड़े रोजगार प्रदाता’ के रूप में और मजबूत करना चाहती है। पीएम मित्र पार्क और पीएलआई स्कीम का जिक्र करना यह संकेत देता है कि अब फोकस केवल घरेलू खपत पर नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ पर है। जब टेक्सटाइल जैसे श्रम-प्रधान (labor-intensive) क्षेत्र में तकनीकी निवेश होता है, तो उसका सबसे बड़ा फायदा अर्ध-शहरी और ग्रामीण आबादी को मिलता है। यह रणनीति न केवल निर्यात बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी जान फूंकेगी, जो भारत के समावेशी विकास के लिए अनिवार्य है।
मुख्य बातें (Key Points)
वस्त्र उद्योग अब पारंपरिक से आधुनिक और रोजगार देने वाला शक्तिशाली सेक्टर बन गया है।
पीएम मित्र पार्क और पीएलआई योजनाएं रोजगार की नई लहर पैदा कर रही हैं।
नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) से भारतीय कपड़ों की वैश्विक पहुंच बढ़ी है।
यह बदलाव ‘आत्मनिर्भर भारत’ की मूल भावना को दर्शाता है।








