Raksha AI Launch: भारत ने बाल सुरक्षा (Child Safety) के क्षेत्र में दुनिया को एक नई राह दिखाई है। ‘प्रोस्पेरिटी फ्यूचर्स’ समिट के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) और Just Rights for Children ने संयुक्त रूप से ‘रक्षा’ (Raksha) नामक एक क्रांतिकारी एआई-पावर्ड समाधान का अनावरण किया है। यह टूल केवल अपराध दर्ज करने के लिए नहीं, बल्कि अपराध को घटित होने से पहले ही रोकने (Prevention) की सोच के साथ तैयार किया गया है, जो 2047 के विकसित भारत की नींव मजबूत करेगा।
‘अपराध होने से पहले ही बजेगी खतरे की घंटी’
आमतौर पर पुलिस या सुरक्षा एजेंसियां तब हरकत में आती हैं जब कोई अपराध घटित हो चुका होता है। लेकिन ‘रक्षा’ एआई इस पुरानी धारणा को बदलने जा रहा है। इस टूल को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यह बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की पहचान ‘प्री-क्राइम’ स्टेज पर ही कर लेता है। यह टूल डेटा का विश्लेषण करके उन कमजोर कड़ियों को पकड़ता है जहां अपराध की संभावना सबसे ज्यादा होती है। चाहे वह बाल तस्करी (Trafficking) हो, बाल विवाह हो या फिर ऑनलाइन चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज, ‘रक्षा’ हर खतरे को पहले ही भांपने की क्षमता रखता है।
‘गरीबी और लाचारी की पहचान करेगा AI’
इस एआई टूल की सबसे बड़ी खासियत इसकी मानवीय समझ है। यह उन आर्थिक विषमताओं और गरीबी (Economic Vulnerability) को स्कैन करता है जो अक्सर बच्चों को अपराध की ओर धकेलती हैं। समाज की मुख्यधारा से कटे हुए परिवार और बच्चे, जो तस्करों के आसान शिकार बन सकते हैं, यह टूल उनकी पहचान करता है। इसका उद्देश्य सिर्फ अपराधी को पकड़ना नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को समझना है जो एक बच्चे को असुरक्षित बनाती हैं।
‘विकसित भारत 2047 का आधार स्तंभ’
समिट में स्पष्ट किया गया कि यदि भारत को 2047 तक ‘विश्व गुरु’ और एक विकसित राष्ट्र बनना है, तो बच्चों की सुरक्षा इसका सबसे बड़ा आधार स्तंभ है। Raksha AI का प्रोटोटाइप लॉन्च करते हुए यह संदेश दिया गया कि तकनीक का सबसे बेहतरीन उपयोग वही है जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सुरक्षा प्रदान करे। यह पहल भारत के हर बच्चे को एक सुरक्षा चक्र प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
‘फरवरी में एआई इम्पैक्ट समिट की तैयारी’
‘प्रोस्पेरिटी फ्यूचर्स’ (Prosperity Futures) दरअसल फरवरी में होने वाले विशाल ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ (AI Impact Summit) का एक आधिकारिक प्री-इवेंट है। इस मंच पर यह चर्चा की गई कि एआई का विकास केवल कोड और एल्गोरिदम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें नैतिक और मानवीय मूल्य (Ethical and Moral Values) भी होने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हम नैतिक मूल्यों से समझौता करके कोई टूल बनाते हैं, तो वह कभी सफल नहीं हो सकता। ‘रक्षा’ इसी ‘वैल्यू बेस्ड एआई’ (Values Based AI) का एक बेहतरीन उदाहरण है।
‘ग्रासरूट लेवल पर सुरक्षा का तंत्र’
इस पहल की सबसे बड़ी जीत यह है कि यह केवल हवा-हवाई बातें नहीं है, बल्कि ज़मीनी स्तर (Grassroot Level) पर काम करने वाली संस्थाओं को एक साथ लेकर चल रही है। MeitY का समर्थन और देश भर की संस्थाओं का जुड़ाव इसे एक विश्वसनीय ‘टेक स्टैक’ बनाता है। यह तकनीक एक ‘लेवल इक्वलाइजर’ की तरह काम करेगी, जो सुदूर गांवों के बच्चों को भी वही सुरक्षा देगी जो शहरों में उपलब्ध है।
संपादकीय विश्लेषण (Editor’s Take)
बाल सुरक्षा के मामले में अब तक हम ‘उपचारात्मक’ (Curative) दृष्टिकोण अपनाते रहे हैं, यानी नुकसान होने के बाद मरहम लगाना। लेकिन ‘रक्षा’ एआई का आगमन भारत की सोच में एक ‘निवारक’ (Preventive) बदलाव को दर्शाता है। जब तकनीक का इस्तेमाल मुनाफे से हटकर मासूम जिंदगियों को बचाने के लिए होता है, तो वह सही मायनों में ‘सार्थक तकनीक’ कहलाती है। यह टूल यह साबित करता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असली मकसद मानवीय संवेदनाओं को खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना होना चाहिए।
जानें पूरा मामला (Background)
भारत में बाल तस्करी और ऑनलाइन शोषण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डिजिटल दुनिया के विस्तार के साथ ही ‘फिजिकल’ और ‘डिजिटल’ खतरों का एक नया ‘फिजिटल’ (Phygital) रूप सामने आया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार और सामाजिक संस्थाएं मिलकर टेक्नोलॉजी का सहारा ले रही हैं, ताकि नई पीढ़ी को एक सुरक्षित भविष्य दिया जा सके।
मुख्य बातें (Key Points)
Raksha AI: यह टूल अपराध होने से पहले ही जोखिम की पहचान कर बच्चों को सुरक्षित करेगा।
Target Areas: बाल विवाह, मानव तस्करी और ऑनलाइन यौन शोषण जैसे अपराधों पर होगा सीधा प्रहार।
Collaboration: यह इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) और Just Rights for Children की संयुक्त पहल है।
Future Vision: फरवरी में होने वाले ‘AI Impact Summit’ से पहले इसे एक प्रमुख समाधान के रूप में पेश किया गया है।








