Assam BJP Rift Rumours को लेकर सोमवार को बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया। 19 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal के कार्यालय ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि असम भाजपा के अंदरूनी मतभेद राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच गए हैं। इन खबरों का आधार एक कथित पत्र बताया जा रहा था, जिसे पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया गया।
केंद्रीय मंत्री के कार्यालय ने साफ कहा कि यह पत्र न केवल जाली है, बल्कि इसमें फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया है, जिसका उद्देश्य जानबूझकर भ्रम फैलाना है।

क्या है पूरा विवाद
मीडिया के कुछ हिस्सों में यह दावा किया गया कि असम में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर Bharatiya Janata Party के भीतर गंभीर मतभेद उभर आए हैं। इन खबरों में कहा गया कि यह कथित पत्र Himanta Biswa Sarma के खिलाफ आरोपों से जुड़ा है और इसे New Delhi तक भेजा गया।
केंद्रीय मंत्री कार्यालय का स्पष्ट बयान
सोनोवाल के कार्यालय ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह पत्र पूरी तरह फर्जी, जाली और मनगढ़ंत है। इसमें आधिकारिक लेटरहेड की नकल की गई है और केंद्रीय मंत्री के नकली हस्ताक्षर किए गए हैं। कार्यालय के अनुसार, इस तरह की सामग्री का कोई आधिकारिक या वास्तविक आधार नहीं है।
कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम
इस मामले को गंभीर अपराध मानते हुए एफआईआर दर्ज कर ली गई है। कार्यालय ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया है कि प्राथमिकता के आधार पर जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह की जालसाजी में पहचान की नकल और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
असम भाजपा में दरार के दावे खारिज
केंद्रीय मंत्री कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि Assam भाजपा में किसी तरह की आंतरिक प्रतिद्वंद्विता या मतभेद की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। पार्टी के भीतर स्थिरता और एकजुटता बरकरार है और अफवाहों के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।
आम जनता और मीडिया के लिए संदेश
कार्यालय ने जनता और मीडिया से अपील की कि वे अपुष्ट और फर्जी सामग्री पर भरोसा न करें। किसी भी जानकारी को प्रसारित करने से पहले केवल आधिकारिक और अधिकृत स्रोतों से पुष्टि करने की सलाह दी गई है।
विश्लेषण
यह मामला दिखाता है कि राजनीतिक माहौल में फर्जी दस्तावेज और झूठी खबरें कितनी तेजी से भ्रम फैला सकती हैं। ऐसे समय में त्वरित स्पष्टीकरण और कानूनी कार्रवाई न केवल किसी नेता की छवि बचाने के लिए जरूरी है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसा बनाए रखने के लिए भी अहम है। यह घटना मीडिया और पाठकों दोनों के लिए सतर्क रहने का संकेत है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सर्बानंद सोनोवाल के नाम से जारी पत्र पूरी तरह फर्जी बताया गया
- असम भाजपा में दरार की खबरें निराधार करार
- फर्जी लेटरहेड और नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल
- मामले में एफआईआर दर्ज, जांच के निर्देश
- जनता और मीडिया को अपुष्ट खबरों से बचने की सलाह








