Andaman Nicobar Biodiversity को लेकर केंद्र सरकार का फोकस और मजबूत हुआ है। 19 जनवरी 2026 को श्री विजयपुरम में केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता भारत की पर्यावरणीय स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दौरान उन्होंने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के अंडमान-निकोबार क्षेत्रीय केंद्र का दौरा किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस द्वीपसमूह को “जैव विविधता की जीवंत प्रयोगशाला” बताते हुए कहा कि यहां विज्ञान, संरक्षण और सतत आजीविका को एक साथ आगे बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
जैव विविधता को बताया राष्ट्रीय नीति की रीढ़
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंडमान और निकोबार जैसे द्वीप क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से निपटने, समुद्री संसाधनों की सुरक्षा और दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक संस्थानों से प्राप्त प्रमाणिक आंकड़े ही प्रभावी राष्ट्रीय नीतियों का आधार बनते हैं।
ZSI की भूमिका पर विशेष जोर
अपने दौरे के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने Zoological Survey of India (जेडएसआई) के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जेडएसआई जैसे संस्थान जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूलन क्षमता और महासागर आधारित आर्थिक विकास से जुड़ी नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वैज्ञानिकों से संवाद, शोध कार्यों की समीक्षा
इस अवसर पर जेडएसआई के प्रभारी अधिकारी C. Shivaperuman ने मंत्री को केंद्र के उद्देश्यों, चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों और द्वीपों की विशिष्ट जीव विविधता के दस्तावेजीकरण व निगरानी के प्रयासों की जानकारी दी। मंत्री को वर्गीकरण, डीएनए बारकोडिंग, आणविक प्रणाली विज्ञान और जैव विविधता मूल्यांकन से जुड़े कार्यों से अवगत कराया गया।
पांच दशकों का शोध, सैकड़ों वैज्ञानिक प्रकाशन
1977 में स्थापित जेडएसआई का यह क्षेत्रीय केंद्र पांच दशकों से उष्णकटिबंधीय द्वीप जैव विविधता पर शोध कर रहा है। अब तक यहां लगभग 90 अनुसंधान कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। वैज्ञानिकों ने 85 पुस्तकें और 850 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित किए हैं, जिससे भारत के जैव विविधता ज्ञान को मजबूती मिली है।
नई प्रजातियों की खोज ने बढ़ाया वैश्विक महत्व
डॉ. जितेंद्र सिंह को बताया गया कि केंद्र के वैज्ञानिकों ने विज्ञान के लिए 20 से अधिक नई प्रजातियों की पहचान की है, जिनमें नारकोंडम ट्री श्रू भी शामिल है। इसके अलावा, अंडमान-निकोबार और दक्षिण-पूर्व एशिया से लगभग 900 नए जीव-जंतुओं के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं, जो इस क्षेत्र के वैश्विक महत्व को दर्शाते हैं।
ZSI संग्रहालय बना जन-जागरूकता का केंद्र
केंद्रीय मंत्री ने जेडएसआई संग्रहालय का भी दौरा किया, जहां 22 जीव-जंतु समूहों के करीब 3,500 नमूने संरक्षित हैं। उन्हें बताया गया कि हर साल 75,000 से 1,00,000 लोग इस संग्रहालय का भ्रमण करते हैं, जिससे जैव विविधता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ रही है।
प्रवाल भित्ति अनुसंधान में भी अहम भूमिका
डॉ. जितेंद्र सिंह को यह भी जानकारी दी गई कि पोर्ट ब्लेयर स्थित जेडएसआई केंद्र भारत के पहले राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान का नोडल केंद्र है। इसका उद्देश्य भारतीय जलक्षेत्र में प्रवाल भित्तियों के संरक्षण और निगरानी को मजबूत करना है।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा
इस पहल का सीधा असर पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, मत्स्य पालन और स्थानीय आजीविका पर पड़ेगा। मजबूत वैज्ञानिक आधार से नीतियां बनने पर द्वीपवासियों के लिए रोजगार और सतत विकास के नए अवसर पैदा होंगे।
विश्लेषण
डॉ. जितेंद्र सिंह का यह बयान सिर्फ एक वैज्ञानिक दौरा नहीं, बल्कि भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय नीति की दिशा को स्पष्ट करता है। अंडमान-निकोबार की जैव विविधता को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक रणनीति से जोड़ना यह दिखाता है कि सरकार अब संरक्षण और विकास को समानांतर आगे बढ़ाने की सोच पर काम कर रही है।
क्या है पृष्ठभूमि
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह अपनी विशिष्ट जैव विविधता, स्थानिक और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। जेडएसआई पिछले कई दशकों से यहां वैज्ञानिक शोध और संरक्षण में जुटा हुआ है, जिससे भारत का वैश्विक जैव विविधता मानचित्र और मजबूत हुआ है।
मुख्य बातें (Key Points)
- डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंडमान-निकोबार को बताया जैव विविधता की जीवंत प्रयोगशाला
- ZSI के पांच दशकों के शोध ने मजबूत किया भारत का ज्ञान आधार
- 20+ नई प्रजातियों की पहचान, 900 नए जीव रिकॉर्ड
- जेडएसआई संग्रहालय से बढ़ रही जन-जागरूकता
- समुद्री अर्थव्यवस्था और जलवायु नीति से जुड़ा संरक्षण








