Compressed Biogas Plant Chandigarh चंडीगढ़ में कचरा प्रबंधन और हरित ऊर्जा को लेकर आज बड़ा कदम उठाया जा रहा है। डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट के लिए भूमि चिन्हांकन समारोह आयोजित किया जा रहा है, जो शहर के वेस्ट प्रोसेसिंग सिस्टम को नई दिशा देगा।
चंडीगढ़ नगर प्रशासन आज एक ऐसे प्रोजेक्ट की नींव रख रहा है, जिससे शहर की सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्या माने जाने वाले डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। Municipal Corporation of Chandigarh की ओर से 19 जनवरी को कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट के लिए भूमि चिन्हांकन समारोह आयोजित किया जा रहा है।
UT Administrator की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम
यह समारोह यूटी प्रशासक Gulab Chand Kataria की मौजूदगी में होगा। इसे डड्डूमाजरा डंपिंग साइट को पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ सुविधा में बदलने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
2019 से चल रही बायोरिमेडिएशन का नतीजा
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, डड्डूमाजरा में 2019 से चरणबद्ध तरीके से लेगेसी वेस्ट की बायोरिमेडिएशन की जा रही थी। इस प्रक्रिया से अब तक करीब 28 एकड़ जमीन रिक्लेम की जा चुकी है, जिससे पर्यावरणीय खतरे कम हुए और भूमि के वैज्ञानिक उपयोग का रास्ता खुला।

IOCL के साथ साझेदारी, निगम पर कोई खर्च नहीं
इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम ने Indian Oil Corporation Limited के साथ साझेदारी की है। यह परियोजना डिजाइन–बिल्ड–फाइनेंस–ऑपरेट (DBFO) मॉडल पर आधारित है, जिसमें नगर निगम को न तो पूंजी निवेश करना होगा और न ही संचालन व रखरखाव का खर्च उठाना पड़ेगा।
1 रुपये प्रति एकड़ पर दी गई जमीन
20 नवंबर 2025 को नगर निगम और IOCL के बीच एमओयू साइन हुआ था। आज के समारोह में लगभग 10 एकड़ जमीन औपचारिक रूप से IOCL को सौंपी जाएगी। यह जमीन प्रतीकात्मक दर पर 1 रुपये प्रति एकड़ प्रति माह के हिसाब से लीज पर दी गई है। भविष्य के विस्तार के लिए अतिरिक्त 5 एकड़ जमीन का प्रावधान भी रखा गया है।
200 टन कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा
प्लांट के चालू होने के बाद रोजाना करीब 200 टन अलग किए गए गीले कचरे और 10 प्रतिशत तक मिक्स वेस्ट के साथ 30 टन गोबर को प्रोसेस किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 125 करोड़ रुपये बताई गई है।
CPCB के मानकों के तहत होगा संचालन
अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना Central Pollution Control Board के सभी मानकों का पालन करेगी। पर्यावरणीय सुरक्षा के तहत प्रोजेक्ट एरिया में अनिवार्य रूप से 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी।
आम लोगों पर क्या होगा असर
CBG प्लांट से डंपिंग ग्राउंड पर कचरे का दबाव कम होगा, मीथेन जैसी हानिकारक गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और स्वच्छ ईंधन का उत्पादन होगा। इससे खासतौर पर डड्डूमाजरा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को लंबे समय में स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों स्तरों पर राहत मिलने की उम्मीद है।
विश्लेषण
डड्डूमाजरा में CBG प्लांट केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि चंडीगढ़ के लिए वेस्ट-टू-एनर्जी मॉडल की ओर ठोस कदम है। बिना निगम के वित्तीय बोझ के इतना बड़ा प्रोजेक्ट यह दिखाता है कि पब्लिक–प्राइवेट साझेदारी से शहरी पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव है।
जानें पूरा मामला
चंडीगढ़ नगर निगम वर्षों से डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की समस्या से जूझ रहा था। बायोरिमेडिएशन के बाद अब उसी जमीन पर CBG प्लांट लगाकर कचरे से स्वच्छ ऊर्जा बनाने की योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- डड्डूमाजरा में CBG प्लांट के लिए आज भूमि चिन्हांकन
- UT Administrator की मौजूदगी में होगा समारोह
- IOCL के साथ DBFO मॉडल पर साझेदारी
- नगर निगम पर कोई वित्तीय बोझ नहीं
- रोजाना 200 टन कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा








