Bikram Singh Majithia Bail Case चंडीगढ़ से जुड़ा आय से अधिक संपत्ति का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता Bikram Singh Majithia को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली। अदालत में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन पंजाब सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।

सुप्रीम कोर्ट में हुई इस सुनवाई ने यह साफ कर दिया कि मजीठिया की कानूनी लड़ाई अभी लंबी चलने वाली है। अदालत ने न सिर्फ जमानत के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा, बल्कि जेल में उनकी सुरक्षा को लेकर भी अहम सवाल उठाए।
सुप्रीम कोर्ट में कैसे चली सुनवाई
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने की। मजीठिया की ओर से पेश हुए वकील एडवोकेट अग्रवाल ने अंतरिम जमानत पर बहस की अनुमति मांगी। उन्होंने अदालत से कहा कि मजीठिया भागने वाले नहीं हैं और उनकी जान को खतरा है।
कोर्ट के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने सीधे सवाल पूछे कि मजीठिया कब से जेल में हैं, उनकी जान पर कितनी बार हमला हुआ है और क्या उन्हें किसी दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया है। अदालत ने यह भी पूछा कि अगर उन्हें चंडीगढ़ जेल में स्थानांतरित करने की मांग है, तो इसमें सरकार को क्या आपत्ति है।
पंजाब सरकार का पक्ष
पंजाब सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने अदालत से दो हफ्ते का समय मांगा। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के सामने यह भरोसा दिया गया है कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। सरकार के अनुसार, इस स्तर पर अंतरिम जमानत पर फैसला करना जल्दबाजी होगी।
540 करोड़ बनाम 40 करोड़ का तर्क
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी भी की कि मामला 540 करोड़ रुपए के सार्वजनिक धन से जुड़ा है। इस पर मजीठिया पक्ष ने दलील दी कि चार्जशीट केवल 40 करोड़ रुपए की है और पिछली सुनवाई में भी सरकार ने समय मांगा था।

25 जून से जेल में हैं मजीठिया
तीन बार विधायक रह चुके मजीठिया को 25 जून को अमृतसर स्थित उनके आवास और 25 अन्य ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। विजिलेंस टीम ने इस दौरान डिजिटल उपकरण, प्रॉपर्टी दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए थे।
रिमांड से न्यायिक हिरासत तक
26 जून को मोहाली की अदालत ने मजीठिया को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था, जिसे बाद में चार दिन और बढ़ाया गया। 6 जुलाई को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। फिलहाल वह नाभा जेल में बंद हैं और रक्षा बंधन, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार जेल में ही बिता चुके हैं।
40 हजार पेज की चार्जशीट और 200 गवाह
22 अगस्त को विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में 40 हजार से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें 200 से अधिक गवाहों के बयान शामिल हैं। यह केस 2013 में सामने आए 6,000 करोड़ रुपए के सिंथेटिक ड्रग रैकेट की जांच से जुड़ा बताया गया है।
ड्रग केस से भ्रष्टाचार तक
इस रैकेट का सरगना पूर्व डीएसपी जगदीश सिंह भोला बताया गया था, जिसने पूछताछ के दौरान मजीठिया का नाम लिया था। हालांकि ड्रग से जुड़े आरोप बाद में अदालतों में खारिज हो गए, लेकिन मौजूदा मामला भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग पर केंद्रित है।
700 करोड़ की संपत्ति का दावा
विजिलेंस ब्यूरो ने चार्जशीट में 700 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति का जिक्र किया है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, यूपी और दिल्ली में 15 ठिकानों की जांच के बाद यह चार्जशीट तैयार की गई है, जिसमें कई अकाली और बीजेपी नेताओं के बयान भी दर्ज हैं।
विश्लेषण
सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई ने साफ संकेत दिया है कि अदालत मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। एक ओर जहां मजीठिया पक्ष सुरक्षा और अंतरिम जमानत की मांग कर रहा है, वहीं सरकार समय लेकर अपने मजबूत दस्तावेजी सबूतों के साथ अदालत में उतरना चाहती है। जनता के पैसे से जुड़े 540 करोड़ जैसे आंकड़े इस केस को केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बनाते हैं।
जानें पूरा मामला
आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में फंसे बिक्रम सिंह मजीठिया की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली है और अब सबकी नजरें 2 फरवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल बिक्रम मजीठिया को राहत नहीं
- पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्ते का समय
- अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय
- मामला आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा








