IPC 295A controversy : शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष Sukhbir Singh Badal ने दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Atishi के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा स्पीकर Vijender Gupta को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है। यह पूरा मामला गुरु साहिबानों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और धार्मिक भावनाएं आहत करने वाली टिप्पणी से जुड़ा है।
स्पीकर को भेजे पत्र में क्या कहा
सुखबीर सिंह बादल ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला उन्हें न केवल शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष के तौर पर, बल्कि एक आस्थावान सिख होने के नाते भी गहरे आघात पहुंचाने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतिशी का आचरण सदन की गरिमा के खिलाफ है और यह विशेषाधिकार हनन व सदन की अवमानना की श्रेणी में आता है।
विधानसभा सदस्य बने रहने का नैतिक अधिकार खोने का आरोप
सुखबीर बादल ने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि यदि सार्वजनिक रूप से किसी अल्पसंख्यक समुदाय के धर्म, गुरु साहिबानों और आस्था का अपमान करता है, तो वह न केवल नैतिक वैधता बल्कि संवैधानिक अधिकार भी खो देता है। उनके अनुसार यह आचरण एक विधायक के पद के अनुरूप नहीं है।
IPC की धाराओं में FIR की मांग
SAD अध्यक्ष ने पत्र में मांग की कि अतिशी के खिलाफ IPC की धारा 295A के तहत धार्मिक भावनाएं आहत करने और धारा 153A के तहत समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने के आरोप में FIR दर्ज करने की सिफारिश की जाए। उन्होंने इसे सिख धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार ‘बेअदबी’ करार दिया।
सांप्रदायिक सौहार्द पर खतरे की चेतावनी
सुखबीर बादल ने चेताया कि इस तरह की कथित उकसावे वाली टिप्पणियां पंजाब और देश के अन्य हिस्सों में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द के माहौल के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर देश-विदेश में बसे सिखों में गहरी चिंता है।
अकाल तख्त साहिब का संदर्भ
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि यह मामला पंथिक संस्थानों के संज्ञान में है, जिनका नेतृत्व सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था Shri Akal Takht Sahib करती है। सुखबीर बादल ने गुरु साहिबानों को अकाल पुरख की शाश्वत आध्यात्मिक सत्ता का प्रतीक बताया।
विश्लेषण (Analysis): क्यों बढ़ा राजनीतिक और धार्मिक तनाव
यह विवाद केवल एक कानूनी मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी दूरगामी हो सकते हैं। एक ओर जहां SAD इसे सिख समुदाय की अस्मिता और आस्था से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरी ओर यह मामला दिल्ली की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर बहस को तेज कर सकता है। यदि स्पीकर स्तर पर कोई कार्रवाई होती है, तो इसका असर भविष्य में नेताओं के सार्वजनिक बयानों की सीमा तय करने में भी दिख सकता है।
जानें पूरा मामला
सुखबीर सिंह बादल ने दिल्ली विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अतिशी की सदस्यता रद्द करने और उनके खिलाफ IPC की धाराओं में FIR की सिफारिश करने की मांग की है। मामला गुरु साहिबानों के खिलाफ कथित टिप्पणी और उससे आहत धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- सुखबीर बादल ने अतिशी की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की
- IPC 295A और 153A के तहत FIR की सिफारिश का आग्रह
- SAD ने इसे सदन की अवमानना और धार्मिक बेअदबी बताया
- पंथिक संस्थानों और अकाल तख्त साहिब का संदर्भ दिया गया








