Bharat Taxi vs Ola Uber – जब कैब बुक करने की बात आती है तो ज़्यादातर लोग Ola और Uber पर भरोसा करते हैं। लेकिन अब भारत की होम-ग्रोन कैब सर्विस Bharat Taxi ने बाज़ार में एंट्री लेकर सस्ता और बिना सर्ज किराए का दावा किया है। इसी दावे की हकीकत जानने के लिए नोएडा फिल्म सिटी से IGI एयरपोर्ट तक रियल-टाइम किराए का टेस्ट किया गया।

रियल-टाइम किराया टेस्ट: नोएडा से IGI एयरपोर्ट
एक ही समय पर, एक ही रूट और समान परिस्थितियों में तीनों ऐप पर कैब बुक करने की कोशिश की गई। दूरी करीब 28 किलोमीटर थी और समय शाम 4:40 के आसपास।
नॉर्मल कैब में Ola का किराया ₹555–₹572 के बीच दिखा। Uber थोड़ा सस्ता रहा और ₹453 दिखाया। वहीं Bharat Taxi में नॉर्मल कैब का किराया सबसे ज्यादा, करीब ₹600 दिखा। यानी आमतौर पर बुक की जाने वाली नॉर्मल कैब में भारत टैक्सी सस्ती साबित नहीं हुई।
एक्सेल कैब में तस्वीर थोड़ी बदली
Excel कैब कैटेगरी में Ola सबसे सस्ता ₹866 पर दिखा, Uber सबसे महंगा रहा और Bharat Taxi का किराया ₹948 के आसपास रहा। इससे साफ हुआ कि कुछ खास मामलों में ही भारत टैक्सी का किराया कम हो सकता है, हर स्थिति में नहीं।
किराया क्यों बदलता है?
किराया समय, डिमांड और उपलब्धता जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है। आने वाले समय में जब भारत टैक्सी का यूज़र बेस बढ़ेगा और सर्विस पूरी तरह फैल जाएगी, तब इसकी कीमतों की असली तस्वीर सामने आएगी।
कोऑपरेटिव मॉडल: ड्राइवर भी पार्टनर
भारत टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत इसका कोऑपरेटिव मॉडल है। इसमें ड्राइवर केवल सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के मेंबर और पार्टनर भी होते हैं। ड्राइवरों से कम कमीशन लिया जाता है, जिससे वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा अपने पास रख सकते हैं। यह सर्विस सहकार टैक्सी कॉरपोरेटिव लिमिटेड के जरिए चलाई जा रही है और दावा है कि इसमें सर्ज प्राइसिंग नहीं होगी।
फीचर्स और सुरक्षा पर फोकस
एक ही ऐप से कार, ऑटो और बाइक बुक करने की सुविधा दी जा रही है। ड्राइवर वेरिफिकेशन, लाइव ट्रैकिंग और सपोर्ट सिस्टम जैसे फीचर्स यात्रियों की सुरक्षा के लिए शामिल किए गए हैं। शुरुआत में यह ऐप एयरपोर्ट राइड्स तक सीमित थी, लेकिन अब दिल्ली-एनसीआर में किसी भी लोकेशन के लिए उपलब्ध है।
ड्राइवर क्या कह रहे हैं?
कुछ ड्राइवरों का कहना है कि अभी राइड वॉल्यूम कम है, इसलिए वे सिर्फ इसी ऐप पर निर्भर नहीं रह सकते। कुछ को शॉर्ट राइड्स में Ola और Uber से ज्यादा कमाई नहीं दिख रही, जबकि शुरुआत में ज्यादा कमाई का वादा किया गया था। हालांकि, कंपनी ड्राइवरों को इनकम स्टेबिलिटी देने का दावा कर रही है।
विश्लेषण: दावा बड़ा, परीक्षा जारी
भारत टैक्सी यात्रियों को ट्रांसपेरेंट किराया और ड्राइवरों को हिस्सेदारी देने का मॉडल लेकर आई है। लेकिन रियल-टाइम किराया टेस्ट में नॉर्मल कैब में यह सस्ती साबित नहीं हुई। अगर सर्ज प्राइसिंग सच में नहीं लगती और ड्राइवरों की कमाई स्थिर होती है, तो यह मॉडल लंबी रेस का खिलाड़ी बन सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- नॉर्मल कैब में Bharat Taxi, Ola और Uber से सस्ती नहीं दिखी
- Excel कैब में कुछ मामलों में किराया मुकाबले का रहा
- कोऑपरेटिव मॉडल में ड्राइवर पार्टनर हैं, कमीशन कम
- सर्ज प्राइसिंग न होने का दावा, लेकिन असली परीक्षा बाकी








