Iran Nuclear Weapons : ईरान ने खुले तौर पर ऐलान किया है कि अगर युद्ध हुआ तो सिर्फ 24 घंटे में वो परमाणु हथियारों से लैस हो जाएगा और इजराइल व अमेरिका दोनों उसके निशाने पर होंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने ईरान को यूरेनियम सप्लाई करना शुरू कर दिया है और सीक्रेट साइट्स पर 11 न्यूक्लियर बम बनाने की तैयारी पूरी है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान आजादी चाहता है और अमेरिका मदद के लिए तैयार है। दूसरी तरफ ईरान के 100 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं जिसमें 217 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
ईरान की पार्लियामेंट में युद्ध की धमकी
ईरान के स्पीकर ने पार्लियामेंट में बैठकर खुले तौर पर ऐलान किया है कि इजराइल और अमेरिका दोनों उनके निशाने पर होंगे। पहली बार इतने सीधे शब्दों में युद्ध की धमकी दी गई है।
स्पीकर ने कहा कि ईरान की सारी सैन्य ताकत इन दोनों देशों को जवाब देने के लिए तैयार है। यह बयान उस वक्त आया जब ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान आजादी की तरफ देख रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान अपनी सेना को ना सिर्फ मजबूत कर रहा है बल्कि चीन से मॉडर्न फाइटर प्लेन भी ले रहा है। फोर्थ जनरेशन फाइटर प्लेन अब ईरान की सेना का हिस्सा बन रहे हैं।
मिसाइल फैक्ट्रियां 24 घंटे काम कर रही हैं। सोडियम पेट्रिएट जो मिसाइल बनाने का की मटेरियल है उसकी तैयारी जोरों पर है। एक झटके में 2000 से ज्यादा मिसाइल बनाने की क्षमता ईरान के पास आ जाएगी।
सबसे बड़ी बात यह है कि चीन ने न्यूक्लियर बम के लिए यूरेनियम सप्लाई करना शुरू कर दिया है। सीक्रेट साइट्स पर 24 घंटे के भीतर 11 न्यूक्लियर बम बनने की बात कही जा रही है।
ट्रंप का सोशल मीडिया पर बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान इस कदर आजादी की तरफ देख रहा है जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के लोगों की मदद के लिए तैयार है।
यह बयान आते ही ईरान के स्पीकर ने जवाबी धमकी दे दी। दोनों तरफ से युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं।
ट्रंप ने पहले अमेरिकी पार्लियामेंट में कहा था कि ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना सकता क्योंकि उसकी सारी जगहें नष्ट कर दी गई हैं। लेकिन अब ईरान का दावा कुछ और ही कह रहा है।
ईरान में 100 से ज्यादा शहरों में हिंसा
ईरान के भीतर तकरीबन 100 शहरों में हिंसा हो रही है। जो लोग मारे गए हैं उनकी तादाद 217 से ज्यादा है। 2600 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
कुछ रिपोर्ट्स कह रही हैं कि मौत की असली तादाद हजारों में है। अलग-अलग एजेंसियों की रिपोर्ट्स और भी भयावह तस्वीर पेश कर रही हैं।
ईरान की सड़कों पर लोग सत्ता के खिलाफ खड़े हैं। लेकिन इसी दौरान क्राउन प्रिंस पहलवी अमेरिका में बैठकर ईरान के लोगों के लिए वीडियो मैसेज भेज रहे हैं।
क्राउन प्रिंस पहलवी की भूमिका
50 साल पहले क्राउन प्रिंस पहलवी अमेरिका चले गए थे। अब अमेरिका ईरान में तख्तापलट और सत्ता परिवर्तन चाहता है। वहां के लोग चाह रहे हैं कि पहलवी सत्ता में आ जाएं।
पहलवी अमेरिका से वीडियो बना रहे हैं और कह रहे हैं कि लोग सड़क पर उतरना जारी रखें। अमेरिका कह रहा है कि सड़क पर उतरे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो वो दखल देगा।
इस दखल का इंतजार इजराइल कर रहा है क्योंकि इजराइल कह रहा है कि ईरान के साथ युद्ध अभी थमा नहीं है।
लंदन में ईरानी दूतावास पर झंडा बदला
लंदन की सड़कों पर ईरान के दूतावास में एक चौंकाने वाली घटना हुई। एक युवक ने दूतावास पर चढ़कर इस्लामिक गणराज्य का झंडा हटा दिया।
उसने 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले का झंडा लगा दिया जो शाह के दौर का था। नीचे नारे लगने लगे फ्री ईरान और डेमोक्रेसी फॉर ईरान।
यह घटना दिखाती है कि ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी माहौल बन रहा है।
ईरान में मौत की सजा का फरमान
ईरान के जनरल प्रोसीक्यूटर काजिम मुआदेही ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि दंगों में शामिल सभी लोगों पर एक ही आरोप तय करें।
वो आरोप है खुदा के खिलाफ युद्ध छेड़ना जिसकी सजा मौत है। यानी प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दी जा सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया में ईरान की जनता बीच में आकर खड़ी हो गई है। एक तरफ आजादी की मांग है और दूसरी तरफ मौत की सजा का डर।
यूरोपीय यूनियन का रुख
यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लायन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि तेहरान की सड़कों और दुनिया भर के शहरों में आजादी की मांग कर रही ईरानी महिलाओं और पुरुषों के कदमों की गूंज सुनाई दे रही है।
उन्होंने आगे लिखा कि बोलने, इकट्ठा होने, यात्रा करने और सबसे बढ़कर आजादी से जीने की आजादी यूरोप पूरी तरह उनके साथ खड़ा है।
उन्होंने प्रदर्शनों के हिंसक दमन की कड़ी निंदा की और जेल में बंद प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग की।
चीन और रूस का खुला समर्थन
इन सबके बीच रूस और चीन ने खुले तौर पर ईरान का साथ देना शुरू कर दिया है। चीन परमाणु हथियारों से ईरान को लैस कर रहा है।
रूस भी स्ट्रेटेजिक तौर पर मदद कर रहा है। इस पूरे इलाके में कोई नहीं चाहता कि अमेरिका ईरान का तख्तापलट करे।
अगर अमेरिका वेनेजुएला के बाद ईरान में तख्तापलट कर देता है तो एशियाई देशों और मिडिल ईस्ट में कोई नहीं बचेगा। यह चिंता इन देशों में है।
नेतन्याहू से अमेरिकी विदेश मंत्री की बातचीत
कल ही बेंजामिन नेतन्याहू से अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने टेलीफोन पर बातचीत की। बातचीत में क्या हुआ यह सामने नहीं आया।
लेकिन यह साफ है कि अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं। यूरोपीय यूनियन भी इस मामले में अमेरिका के साथ खड़ी है।
भारत को G7 बैठक में पहला निमंत्रण
सबसे बड़ी खबर यह है कि कल वाशिंगटन में G7 यानी विकसित देशों के फाइनेंस मिनिस्टर्स की बैठक है। इसमें पहली बार भारत को निमंत्रण दिया गया है।
G7 में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और यूरोपीय यूनियन शामिल हैं। बैठक का मुख्य मुद्दा क्रिटिकल मिनरल यानी दुर्लभ और रणनीतिक खनिज है।
यह निमंत्रण उस वक्त दिया गया जब भारत रेयर मटेरियल्स को लेकर चीन के साथ समझौता कर रहा है। इससे अमेरिका में बेचैनी है।
भारत की दुविधा
भारत अपनी आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए चीन के साथ संबंध प्रगाढ़ बना रहा है। पांच साल पहले जो प्रतिबंध चीन की कंपनियों पर लगाए गए थे उन्हें खत्म करने की प्रक्रिया चल रही है।
फाइनेंस मिनिस्ट्री काम कर रही है कि चीन की कंपनियां भारत में बिजनेस डील का हिस्सा बन सकें। सरकारी योजनाओं की बिडिंग में भी चीन शामिल हो सकेगा।
लेकिन G7 बैठक में चीन को निशाने पर लिया गया है। अमेरिका चाहता है कि भारत चीन से दूर रहे।
G7 बैठक का मुख्य एजेंडा
G7 बैठक में क्रिटिकल मिनरल पर चर्चा होनी है। चीन ने इस क्षेत्र में दुनिया पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है जिससे अमेरिका भी प्रभावित हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया ने अक्टूबर में अमेरिका के साथ 8.5 मिलियन डॉलर का क्रिटिकल मिनरल प्रोजेक्ट शुरू किया है। भारत को भी इस दिशा में चलना होगा।
भारत को तकनीक चाहिए, फंडिंग चाहिए और सप्लाई पार्टनरशिप चाहिए। सरकारी कंपनियों को विदेशों से खनिज संपत्तियों का अधिग्रहण करने को कहा गया है।
अमेरिका की रणनीति पर सवाल
ट्रंप की अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग रणनीति है। वेनेजुएला, कोलंबिया, कनाडा, ग्रीनलैंड और अब ईरान सब को धमकियां मिल रही हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देश कह रही हैं यह नाटो पर हमला होगा। कनाडा की सड़कों पर भी विरोध हो रहे हैं।
तेल अवीव में नेतन्याहू का विरोध हो रहा है। अमेरिका में ट्रंप का विरोध हो रहा है। एक अजीब परिस्थिति पैदा हो गई है।
तीसरे विश्व युद्ध का खतरा
अगर ईरान परमाणु हथियारों से लैस हो जाता है तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की दिशा में बढ़ सकती है। वो भी परमाणु युद्ध की दिशा में।
एक तरफ अमेरिका और यूरोप हैं। दूसरी तरफ चीन, रूस और ईरान। दुनिया दो हिस्सों में बंटती दिख रही है।
अगले कुछ घंटों में चीजें किसी भी दिशा में जा सकती हैं। यह इम्तिहान ट्रंप का भी है।
विश्लेषण: बदलती विश्व व्यवस्था
यह लड़ाई असल में आर्थिक ताकत बनने की है। जहां जहां तेल मौजूद है और जहां मिनरल्स हैं वहां अमेरिका कब्जा करना चाहता है। वेनेजुएला से निकला मैसेज यही था।
चीन ने रोड एंड बेल्ट परियोजना से 150 देशों को जोड़ लिया है। अब ट्रंप अपनी आर्थिक ताकत से इसे चुनौती देना चाहते हैं।
भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी। भारत स्वतंत्र देश के तौर पर दुनिया के सामने मजबूती के साथ खड़ा हो यह जरूरी है। यही इस पूरे घटनाक्रम का सबक है।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान ने दावा किया है कि 24 घंटे में 11 परमाणु बम बना सकता है और 2000 से ज्यादा मिसाइल तैयार कर सकता है
- चीन ने ईरान को यूरेनियम सप्लाई करना शुरू कर दिया है और फोर्थ जनरेशन फाइटर प्लेन भी दे रहा है
- ईरान में 100 से ज्यादा शहरों में हिंसा जारी है जिसमें 217 से ज्यादा लोगों की मौत और 2600 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं
- भारत को पहली बार G7 की क्रिटिकल मिनरल बैठक में निमंत्रण मिला है जो अमेरिका-चीन के बीच भारत की अहमियत दर्शाता है
- ईरान में प्रदर्शनकारियों पर खुदा के खिलाफ युद्ध का आरोप लगाया जा रहा है जिसकी सजा मौत है







