Somnath Temple History : समुद्र की लहरों के बीच आज भी अडिग खड़ा सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हजारों वर्षों के संघर्ष, स्वाभिमान और पुनर्जन्म की जीवित कहानी है। करीब एक हजार साल पहले इस मंदिर पर पहला भीषण आक्रमण हुआ, जब विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने इसे ध्वस्त कर दिया। मंदिर को लूटा गया, जलाया गया, लेकिन आस्था नहीं टूटी और विश्वास पराजित नहीं हुआ।

पहला आक्रमण और इतिहास की दर्दनाक याद
सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण की आज हजारवीं स्मृति याद की जा रही है। वर्ष 1026 की जनवरी भारतीय इतिहास की उन तारीखों में दर्ज है, जब इस भव्य मंदिर को तहस-नहस कर दिया गया। महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर उसे खंडहर में बदल दिया और भारी मात्रा में संपत्ति लूटकर ले गया।
क्यों निशाने पर आया सोमनाथ मंदिर
इतिहासकारों के अनुसार उस दौर में भारत के बड़े हिंदू मंदिर अपार संपत्ति के केंद्र हुआ करते थे। The Age of Wrath में उल्लेख है कि मंदिरों का विध्वंस एक ओर जहां धार्मिक उन्माद से जुड़ा था, वहीं दूसरी ओर अथाह दौलत पाने का साधन भी बन गया था। यही कारण रहा कि महमूद गजनवी ने अपने 32 साल के शासनकाल में भारत पर 17 बार आक्रमण किए।

हमले से पहले कैसा था सोमनाथ मंदिर
महमूद के हमले से कई सौ साल पहले बना यह मंदिर एक किले जैसी भव्य संरचना था। तीनों ओर से समुद्र से घिरा यह मंदिर ऐसा प्रतीत होता था मानो समुद्र स्वयं इसकी पहरेदारी कर रहा हो। मंदिर के भीतर शिवलिंग स्थापित था, जो बिना किसी सहारे जमीन से लगभग दो मीटर ऊंचाई पर स्थित था। इसके आसपास सोने और चांदी की अन्य मूर्तियां थीं। 13 मंजिला ऊंचे मंदिर का शिखर सोने से बना था और फर्श सागवान की लकड़ी से तैयार किया गया था।

महमूद गजनवी का हमला और लूट
अक्टूबर 1024 में महमूद गजनवी 3000 घुड़सवार सैनिकों के साथ अपने सबसे बड़े लूट अभियान पर निकला। सोमनाथ पहुंचकर उसने मंदिर में प्रवेश किया, शिवलिंग को विकृत किया और मूर्तियों को उखाड़ फेंका। मूर्तियों के नीचे छिपा खजाना देखकर वह चकित रह गया। मंदिर की दीवारों, छतों और किवाड़ों से सोना-चांदी उखाड़ी गई। गुप्त कोष की तलाश में गर्भगृह तक खुदवा दिया गया और अंत में मंदिर में आग लगा दी गई।
कितनी संपत्ति लूटी गई
इतिहास के अनुसार सोमनाथ मंदिर से महमूद गजनवी को करीब 6 टन यानी लगभग 60 क्विंटल सोना मिला। वह करीब 15 दिन तक सोमनाथ में रुका और फिर लूटे गए धन के साथ गजनी लौट गया।
आस्था जो कभी नहीं टूटी
मंदिर को कई बार विदेशी आक्रमणकारियों ने खंडहर में बदला, लेकिन हर बार सोमनाथ पुनर्जीवित हुआ। यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि पत्थर और गारे से बनी इमारतें टूट सकती हैं, लेकिन श्रद्धा और विश्वास को नष्ट नहीं किया जा सकता।
Human Impact
सोमनाथ मंदिर की कहानी केवल अतीत की त्रासदी नहीं, बल्कि आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आत्मसम्मान और आस्था का स्रोत है। यह कथा हर पीढ़ी को यह संदेश देती है कि विनाश के बाद भी पुनर्निर्माण संभव है।
Analysis
सोमनाथ मंदिर का इतिहास भारतीय सभ्यता की सहनशीलता और पुनर्जन्म की शक्ति को दर्शाता है। यह घटना केवल एक धार्मिक स्थल पर हमला नहीं थी, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता पर प्रहार था। इसके बावजूद मंदिर का बार-बार उठ खड़ा होना इस बात का प्रमाण है कि आस्था को पराजित करना संभव नहीं।
मुख्य बातें (Key Points)
-
सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण करीब 1000 साल पहले हुआ
-
महमूद गजनवी ने मंदिर को ध्वस्त कर भारी लूट की
-
मंदिर से लगभग 6 टन सोना लूटा गया
-
कई आक्रमणों के बावजूद आस्था नहीं टूटी
-
सोमनाथ आज भी विश्वास और पुनर्जन्म का प्रतीक है








