Iran Protest : ईरान में इस वक्त हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध अब सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सीधे इस्लामी शासन को चुनौती देने लगे हैं। तेहरान समेत देश के सभी 31 प्रांतों में लोग सड़कों पर हैं, नारे गूंज रहे हैं और कई जगहों पर गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन अब हिंसक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। राजधानी तेहरान सहित 31 प्रांतों में इस्लामी शासन के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, जिन पर सुरक्षा बलों की सख्ती और गोलीबारी के गंभीर दावे सामने आए हैं।
प्रदर्शन कैसे विद्रोह में बदले
शुरुआत महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ हुई थी, लेकिन समय के साथ यह आंदोलन “आजादी चाहिए” और “तानाशाह मुर्दाबाद” जैसे नारों में बदल गया। सड़कों पर जुटी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों के इस्तेमाल का आरोप लगाया जा रहा है।
डॉक्टर का दावा: अस्पतालों में पहुंच रहीं लाशें
तेहरान के एक डॉक्टर ने दावा किया है कि केवल राजधानी के छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। अधिकतर मौतें गोली लगने से हुई बताई जा रही हैं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन अगर यह सही हैं तो यह दमन की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
मशीन गन फायरिंग का आरोप
डॉक्टर के अनुसार, उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर मशीन गन से फायरिंग की गई, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मौके पर ही मारे गए। कम से कम 30 लोगों के गोली लगने की बात कही गई है।
इंटरनेट ब्लैकआउट और सन्नाटा
सच बाहर न पहुंचे, इसके लिए देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग बंद कर दी गई हैं। सोशल मीडिया शांत है और विदेशी मीडिया पर सख्त पाबंदियां हैं। इसी वजह से मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
अलग-अलग आंकड़े, एक ही डर
वॉशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी ने कम से कम 63 मौतों का दावा किया है, जिनमें 49 आम नागरिक बताए गए हैं। एक तरफ 63 और दूसरी तरफ 217 मौतों के दावे—सच्चाई इंटरनेट ब्लैकआउट के अंधेरे में दबी नजर आती है।
सरकारी इमारतों में तोड़फोड़
ज्यादातर रैलियां शांतिपूर्ण रहीं, लेकिन कुछ जगहों पर सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ की खबरें आईं। तेहरान की अल रसूल मस्जिद में आग लगाए जाने की घटना के बाद सरकार और सख्त हो गई।
खामनेई का सख्त संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei ने साफ कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक उपद्रवियों के सामने नहीं झुकेगा। सरकारी वकील ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा तक दी जा सकती है।
IRGC की चेतावनी
Islamic Revolutionary Guard Corps के एक अधिकारी ने अभिभावकों से कहा कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें, वरना गोली लगने पर शिकायत न करें।
अमेरिका की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने खामनेई के नेतृत्व वाले शासन को चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
आर्थिक संकट बना गुस्से की जड़
ईरान गहरे आर्थिक संकट में फंसा है। रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। पानी की कमी, बिजली कटौती, बेरोजगारी और महंगाई ने लोगों को सड़कों पर ला दिया है।
विश्लेषण (Analysis)
ईरान में मौजूदा हालात सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सत्ता और जनता के बीच टकराव का संकेत देते हैं। इंटरनेट ब्लैकआउट, गोलीबारी के आरोप और मौत की धमकियां बताती हैं कि शासन किसी भी कीमत पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि सड़कों पर उतरी जनता पीछे हटने के मूड में नहीं दिखती।
आम लोगों पर असर
हिंसा और इंटरनेट बंदी ने आम नागरिकों की जिंदगी ठप कर दी है। जानकारी का अभाव डर बढ़ा रहा है और परिवार अपनों की सलामती को लेकर अनिश्चितता में हैं।
क्या है पृष्ठभूमि
ईरान लंबे समय से आर्थिक दबाव, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। इन्हीं समस्याओं ने जनआक्रोश को जन्म दिया, जो अब इस्लामी शासन के खिलाफ खुले विद्रोह में बदलता दिख रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
-
28 दिसंबर से ईरान में उग्र प्रदर्शन
-
31 प्रांतों तक फैला आंदोलन
-
अस्पतालों में सैकड़ों मौतों के दावे
-
इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग बंद
-
सरकार की गोली और सजा की चेतावनी








