India Foreign Policy Statement : भारत ने शुक्रवार को अपनी विदेश नीति को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग के दौरान भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को अवैध करार दिया और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई। भारत ने साफ कहा कि ऐसी घटनाओं से तेजी और सख्ती से निपटना जरूरी है और किसी भी बाहरी बहाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कौन, कब, कहाँ और क्या
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने शुक्रवार को बयान देते हुए चीन-पाकिस्तान की नीतियों, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों और अमेरिका की टैरिफ धमकियों पर भारत का रुख साफ किया।
CPEC को भारत ने बताया अवैध
भारत ने चीन और पाकिस्तान के तथाकथित आर्थिक गलियारे China Pakistan Economic Corridor को अयोग्य और अवैध घोषित कर दिया। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह परियोजना भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करती है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों पर कड़ी चिंता
रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश में चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों, उनके घरों और व्यवसायों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। भारत का मानना है कि ऐसी सांप्रदायिक घटनाओं से तेजी और सख्ती से निपटना जरूरी है और इन्हें बाहरी कारणों से जोड़ना चिंताजनक है।
अमेरिका को भी भारत का दो टूक जवाब
विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी पर भी प्रतिक्रिया दी। भारत ने कहा कि वह अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से सस्ती ऊर्जा हासिल करने के विकल्पों पर काम करता रहेगा और किसी दबाव में नहीं आएगा।
वेनेजुएला, ईरान और क्षेत्रीय हालात पर नजर
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह वेनेजुएला और पड़ोसी कोलंबिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। साथ ही ईरान को निशाना बनाए जाने की घटनाओं और ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियों पर भी भारत करीबी नजर रखे हुए है।
संयम और शांति की अपील
ताइवान क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील की।
विश्लेषण (Analysis)
इस पूरे बयान से साफ है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक कूटनीतिक रुख अपना रहा है। चीन-पाकिस्तान की चालों, अमेरिका की आर्थिक धमकियों और पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर हमलों—हर मोर्चे पर भारत ने यह संकेत दे दिया है कि उसकी विदेश नीति संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी।
आम लोगों पर असर
भारत के इस रुख का असर सीधे ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर पड़ेगा, जिसका प्रभाव आम नागरिकों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा है।
क्या है पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर बढ़े तनाव, अमेरिका की आक्रामक नीतियां, चीन-पाकिस्तान की रणनीतिक चालें और पड़ोसी देशों में अस्थिरता ने भारत को सख्त और स्पष्ट रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है।
मुख्य बातें (Key Points)
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भारत ने CPEC को अवैध और अयोग्य घोषित किया
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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों पर गहरी चिंता
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अमेरिका की टैरिफ धमकियों पर भारत बेपरवाह
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वेनेजुएला, ईरान और ताइवान घटनाक्रमों पर नजर
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भारत ने स्वतंत्र विदेश नीति दोहराई








