Pakistan Statement on Netanyahu : दुनिया की राजनीति एक बार फिर तीखे बयानों के विस्फोट से कांप उठी है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और भारत को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने अमेरिका से लेकर मध्य-पूर्व तक सियासी हलचल तेज कर दी है। यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब वैश्विक राजनीति पहले से ही तनाव के दौर से गुजर रही है।
कौन, कब, कहाँ और क्या
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक इंटरव्यू में अमेरिका से मांग की कि जिस तरह वेनेजुएला के राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसी तरह इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी पकड़ा जाए। इसी बयान के साथ पाकिस्तान ने भारत को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।

नेतन्याहू को लेकर पाकिस्तान की सनसनीखेज मांग
ख्वाजा आसिफ ने सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से अपील करते हुए कहा कि अगर अमेरिका में इंसानियत जिंदा है, तो इजराइल के प्रधानमंत्री को अगवा कर कोर्ट में पेश किया जाए। उन्होंने नेतन्याहू को मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन बताया और फिलिस्तीनियों के साथ हुए अत्याचारों का हवाला दिया।
वेनेजुएला कार्रवाई से जोड़कर दी दलील
पाकिस्तान ने यह बयान ऐसे समय में दिया, जब अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़ा ऑपरेशन चलाने का दावा किया। अमेरिका के मुताबिक वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolas Maduro पर गंभीर अंतरराष्ट्रीय आरोप तय किए गए हैं। इसी कार्रवाई को आधार बनाकर पाकिस्तान अब इजराइल के खिलाफ भी वैसी ही मांग कर रहा है।

भारत के खिलाफ भी खोला मोर्चा
नेतन्याहू के बयान तक ही पाकिस्तान नहीं रुका। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने चेतावनी दी कि अगर भारत पश्चिमी नदियों पर कोई भी विकास कार्य करता है, तो पाकिस्तान इसे राजनीतिक, कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा। झेलम और नीलम नदियों का जिक्र करते हुए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश साफ नजर आई।
सिंधु जल संधि पर फिर तकरार
पाकिस्तान ने दोहराया कि 1960 की Indus Waters Treaty आज भी लागू है और इसे रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। यह बयान उस पृष्ठभूमि में आया है, जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात कही थी।
आतंकवाद पर पलटवार
पाकिस्तान ने भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar के उस बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान पर दशकों से आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था। जवाब में पाकिस्तान ने उल्टा भारत पर ही आरोप लगाए।
विश्लेषण (Analysis)
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश में तीखे और भड़काऊ बयान दे रहा है। एक तरफ इजराइल के खिलाफ मानवता का झंडा उठाया जा रहा है, दूसरी तरफ भारत पर पानी और आतंकवाद के मुद्दे पर दबाव बनाने की रणनीति साफ दिखती है। सवाल यह है कि क्या यह सच में इंसानियत की लड़ाई है या सिर्फ सियासी शोर।
आम लोगों पर असर
इस तरह के बयानों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है, जिसका असर आम नागरिकों की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और शांति पर पड़ सकता है। भारत-पाक संबंधों में बढ़ती तल्खी का सीधा असर सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ता है।

क्या है पृष्ठभूमि
अमेरिका, इजराइल, पाकिस्तान, भारत और वेनेजुएला—पांचों देश इस वक्त वैश्विक राजनीति के एक संवेदनशील मोड़ पर खड़े हैं, जहां बयान ही सबसे बड़े हथियार बन चुके हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई की मांग की
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अमेरिका की वेनेजुएला कार्रवाई से जोड़ा गया बयान
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भारत पर जल विवाद को लेकर दबाव की कोशिश
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सिंधु जल संधि को लेकर पुरानी तकरार फिर उभरी
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आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-पाक में तीखी बयानबाजी








