MSME Relief Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026 से पहले छोटे उद्योगों की उम्मीदें तेज हो गई हैं। उद्योग संगठन PHD Chamber of Commerce and Industry ने वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को अपने अहम सुझाव सौंपे हैं। संगठन का कहना है कि अगर एमएसएमई सेक्टर को सस्ता कर्ज और ब्याज में राहत मिले, तो भारत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।

बजट से पहले क्यों बढ़ी एमएसएमई की उम्मीदें
1 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर आम लोगों से लेकर उद्योग जगत तक की निगाहें टिकी हैं। जहां एक ओर टैक्स स्लैब और महंगाई से राहत की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर एमएसएमई सेक्टर ने सरकार के सामने अपनी प्राथमिक जरूरतें रख दी हैं। उद्योग संगठनों का मानना है कि छोटे उद्योगों को मजबूती मिले बिना समग्र आर्थिक विकास संभव नहीं है।
2% ब्याज सबवेंशन स्कीम की मांग
पीएचडीसीसीआई ने सुझाव दिया है कि एमएसएमई के लिए 2 फीसदी ब्याज सबवेंशन स्कीम को दोबारा शुरू किया जाए। यह सुविधा नए और अतिरिक्त कर्ज पर लागू होनी चाहिए। इससे उद्योगों की उधारी लागत कम होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना पर फोकस
संगठन ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत मिलने वाले लोन की सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा जरूरतों को देखते हुए छोटे उद्यमियों को ज्यादा और आसान क्रेडिट मिलना चाहिए, ताकि वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकें।
सेवा निर्यात तक दायरा बढ़ाने का सुझाव
पीएचडीसीसीआई ने यह भी कहा है कि इंटरेस्ट इन्क्लूज़न स्कीम को फिर से लागू किया जाए और इसका दायरा सेवा निर्यात तक बढ़ाया जाए। इससे वैश्विक दबावों और टैरिफ का असर एमएसएमई सेक्टर पर कम किया जा सकेगा।
स्टार्टअप्स के लिए खास प्रस्ताव
एमएसएमई के साथ-साथ स्टार्टअप्स के लिए भी सुझाव दिए गए हैं। संगठन का कहना है कि फंड ऑफ फंड्स के जरिए इक्विटी के रूप में सस्ता फंड उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि कंपनियों की सीड कैपिटल जरूरतें पूरी हो सकें।
आम लोगों पर असर
अगर बजट में एमएसएमई सेक्टर को राहत मिलती है तो इसका सीधा फायदा रोजगार, उत्पादन और स्थानीय कारोबार को होगा। छोटे उद्योग मजबूत होंगे तो महंगाई पर दबाव कम हो सकता है और मिडिल क्लास को भी राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
विश्लेषण (Analysis)
एमएसएमई की मांगें बताती हैं कि इस सेक्टर को अब केवल घोषणाओं नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत समर्थन की जरूरत है। सस्ता कर्ज और ब्याज में राहत से छोटे उद्योगों की रीढ़ मजबूत होगी। अगर सरकार इन सुझावों को बजट में शामिल करती है, तो यह आर्थिक सुस्ती के दौर में एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है।

जानें पूरा मामला
केंद्रीय बजट 2026 से पहले पीएचडीसीसीआई ने वित्त मंत्री को सुझाव देकर एमएसएमई सेक्टर के लिए ब्याज सबवेंशन, आसान कर्ज और स्टार्टअप फंडिंग जैसी मांगें रखी हैं। अब सबकी नजर 1 फरवरी के बजट ऐलान पर टिकी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- एमएसएमई सेक्टर ने बजट 2026 से पहले बड़ी राहत की मांग की
- 2% ब्याज सबवेंशन स्कीम दोबारा शुरू करने का सुझाव
- मुद्रा योजना के तहत लोन सीमा बढ़ाने की मांग
- स्टार्टअप्स के लिए सस्ते इक्विटी फंड की जरूरत
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








