ED Raid I-PAC : कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। ईडी ने I-PAC के कार्यालय और उसके प्रमुख के आवास पर छापेमारी की, इसी दौरान मुख्यमंत्री Mamata Banerjee मौके पर पहुंचीं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब राज्य में चुनावी माहौल गर्म है और इसने सीधे तौर पर टीएमसी और बीजेपी को आमने-सामने ला खड़ा किया है।

ईडी रेड से क्यों बढ़ा बवाल
कोलकाता में हुई इस छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जांच के नाम पर पार्टी से जुड़े अहम दस्तावेज और डेटा निशाने पर लिए जा रहे हैं। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई।
क्या है I-PAC और उसका रोल
I-PAC एक राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म है, जिसकी शुरुआत 2013 में Prashant Kishor से जुड़े समूह द्वारा की गई थी। पहले इसे ‘सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस’ के नाम से जाना जाता था, बाद में इसका नाम बदलकर I-PAC कर दिया गया। यह फर्म चुनावी रणनीति और मैनेजमेंट के लिए जानी जाती है और 2019 के बाद से Trinamool Congress के साथ काम कर रही थी।
कौन हैं Pratik Jain
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Pratik Jain की हो रही है। प्रतीक जैन बिहार के Patna के रहने वाले हैं और IIT Bombay के स्कॉलर रह चुके हैं। I-PAC से पहले उन्होंने एक निजी कंपनी में एनालिस्ट के रूप में भी काम किया। चुनावी रणनीति में उन्हें एक अहम चेहरा माना जाता है और यही वजह है कि उनके कार्यालय पर ईडी की कार्रवाई ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया।

रेड के दौरान ममता बनर्जी की मौजूदगी
ईडी की रेड के दौरान ममता बनर्जी का मौके पर पहुंचना अपने आप में असाधारण माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केंद्र की एजेंसियों को सीधा राजनीतिक संदेश देने जैसा है। आमतौर पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई में मुख्यमंत्री का इस तरह हस्तक्षेप दुर्लभ माना जाता है।
ईडी का पक्ष और आरोप
ईडी की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित कोयला चोरी घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़ी है। आरोप है कि घोटाले का पैसा I-PAC तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल चुनावी प्रचार में हुआ। इसी कड़ी में I-PAC और उसके प्रमुख लोगों पर जांच तेज की गई।
राजनीतिक टकराव तेज
इस मामले के सामने आते ही Bharatiya Janata Party और टीएमसी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर टीएमसी इसे राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी का कहना है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं। इस टकराव ने बंगाल की राजनीति को फिर से गरमा दिया है।
आम लोगों पर असर
राजनीतिक हलचल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। चुनावी माहौल में इस तरह की कार्रवाइयों से राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है और विकास, रोजगार जैसे मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।

विश्लेषण (Analysis)
I-PAC पर ईडी की रेड सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली घटना बन गई है। ममता बनर्जी की सक्रिय मौजूदगी यह दिखाती है कि टीएमसी इसे राजनीतिक लड़ाई के रूप में देख रही है, जबकि केंद्र इसे कानून का मामला बता रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तीखा हो सकता है।
जानें पूरा मामला
कोलकाता में ईडी ने I-PAC और उसके प्रमुख से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और जांच को राजनीतिक साजिश बताया। कार्रवाई का संबंध कथित कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जोड़ा जा रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
- कोलकाता में I-PAC और उसके प्रमुख पर ईडी की रेड
- ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं, साजिश का आरोप
- Pratik Jain बने चर्चा का केंद्र
- टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने








