UP SIR Draft 2026 : उत्तर प्रदेश में Special Summary Revision (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इस ड्राफ्ट रोल के सामने आते ही सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर किसके वोट कटे, कहां कटे और क्यों कटे। जिलेवार आंकड़ों के विश्लेषण से साफ हो गया है कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे संदेह और NRC जैसे आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत साबित हुए हैं। जिन इलाकों को लेकर सबसे ज्यादा डर फैलाया जा रहा था, वहां अपेक्षाकृत सबसे कम नाम कटे हैं।
पहली नजर में सामने आए आंकड़े यह दिखाते हैं कि मुस्लिम बहुल जिलों में वोट कटने का प्रतिशत हिंदू बहुल जिलों के मुकाबले काफी कम है। इससे वह पूरा नैरेटिव कमजोर पड़ गया है, जिसमें कहा जा रहा था कि SIR के जरिए अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों को टारगेट किया जा रहा है।
मुस्लिम बहुल जिलों में कम, शहरी इलाकों में ज्यादा नाम कटे
ड्राफ्ट रोल के जिलेवार आंकड़े बताते हैं कि सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मुरादाबाद और रामपुर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में वोट कटने का प्रतिशत अपेक्षाकृत सीमित रहा। इसके उलट लखनऊ, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर जैसे शहरी और हिंदू बहुल जिलों में नाम कटने का प्रतिशत कहीं ज्यादा सामने आया है।
शहरों में माइग्रेशन बना बड़ी वजह
विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि शहरी इलाकों में वोट कटने की एक बड़ी वजह लोगों की ज्यादा आवाजाही और माइग्रेशन है। शहरों में रहने वाले लोग नौकरी या काम के कारण बार-बार जगह बदलते हैं। ऐसे में कई मतदाता एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते हैं, लेकिन वोटर लिस्ट अपडेट नहीं हो पाती। यही कारण है कि शहरी इलाकों में नाम कटने की संख्या ज्यादा दिख रही है।
विपक्ष का NRC जैसा डर क्यों हुआ बेअसर
SIR को NRC से जोड़कर देखने की कोशिश की जा रही थी। दावा किया जा रहा था कि यह प्रक्रिया एक साजिश है, जिसके जरिए खास वर्गों के नाम हटाए जाएंगे। लेकिन आंकड़ों ने इस पूरे दावे को हवा-हवाई साबित कर दिया। जिन इलाकों में वोटिंग प्रतिशत पारंपरिक रूप से ज्यादा रहा है, वहां नाम कटने का असर भी सीमित दिखा।
क्या बीजेपी को हो रहा है ज्यादा नुकसान
इस पूरी प्रक्रिया के बाद एक नई बहस खड़ी हो गई है कि SIR से सबसे ज्यादा नुकसान सत्ताधारी पार्टी को ही हो सकता है। जिन शहरी इलाकों में नाम ज्यादा कटे हैं, वहां बीजेपी का मजबूत आधार माना जाता रहा है। ऐसे में अगर कोई वास्तविक मतदाता सूची से बाहर रह गया है, तो यह चिंता का विषय है और उस पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
विश्लेषण: मतदाता सूची का शुद्धिकरण या राजनीतिक भ्रम
SIR प्रक्रिया को अगर समग्र रूप से देखा जाए, तो यह मतदाता सूची के शुद्धिकरण की कवायद नजर आती है। अगर कोई मतदाता अब उस क्षेत्र में नहीं रहता, उसकी मृत्यु हो चुकी है या उसने कहीं और अपना नाम दर्ज करा लिया है, तो उसका नाम हटना स्वाभाविक है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि कोई भी जीवित और वास्तविक मतदाता गलती से बाहर न रह जाए। इसके लिए अभी भी दावे-आपत्तियों का समय मौजूद है।
मुख्य बातें (Key Points)
- UP SIR Draft 2026 जारी होने के बाद विपक्ष के आरोप कमजोर
- मुस्लिम बहुल जिलों में वोट कटने का प्रतिशत कम
- शहरी और हिंदू बहुल इलाकों में नाम ज्यादा कटे
- माइग्रेशन और कम वोटिंग प्रतिशत बनी बड़ी वजह








