Indore Water Crisis ने शहर की सियासत को गरमा दिया है। मध्यप्रदेश के Indore में भागीरथ इलाके में दूषित पानी की शिकायत को लेकर Indian National Congress और Bharatiya Janata Party के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। हालात इतने बिगड़े कि दोनों पक्षों में जूते-चप्पल चलने की नौबत आ गई।
घटना ने स्थानीय नागरिकों की चिंता को और गहरा कर दिया है, क्योंकि विवाद का केंद्र शहर को मिल रहा पानी और उसकी गुणवत्ता है।

कहाँ और किस मुद्दे पर हुआ बवाल
भागीरथ क्षेत्र में दूषित पानी की शिकायत सामने आने के बाद राजनीतिक कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल तनावपूर्ण हुआ और देखते-देखते हाथापाई में बदल गया।
कैसे बढ़ा विवाद
पानी की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज होती गई। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हुए विरोध जताया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई।

सियासी टकराव का असर
इस टकराव ने स्थानीय प्रशासन और नगर व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। नागरिकों के बीच यह सवाल और मजबूत हुआ है कि दूषित पानी की समस्या का समाधान कब और कैसे होगा।

आम लोगों पर प्रभाव
दूषित पानी की शिकायतें सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी हैं। सियासी झड़प के बीच आम लोग यह जानना चाहते हैं कि सुरक्षित पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कौन लेगा।
क्या है पृष्ठभूमि
इंदौर के भागीरथ क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आईं। इसी मुद्दे पर राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ, जो हिंसक झड़प में बदल गया।
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मुख्य बातें (Key Points)
- इंदौर के भागीरथ इलाके में दूषित पानी को लेकर विवाद
- कांग्रेस-भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प, जूते-चप्पल चले
- पानी की गुणवत्ता और जिम्मेदारी पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप
- आम नागरिकों में स्वास्थ्य और आपूर्ति को लेकर चिंता








