Punjab War Against Drugs Update – पंजाब की धरती को नशा मुक्त बनाने के लिए छिड़ी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए विशेष अभियान ‘‘युद्ध नशेयां विरूद्ध’’ ने महज 10 महीनों में नशा तस्करों की कमर तोड़कर रख दी है। 1 जनवरी को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पुलिस ने एक ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए 42 हजार से अधिक नशा तस्करों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है और अरबों रुपये मूल्य की हेरोइन जब्त की है। यह अभियान न केवल आंकड़ों में बड़ा है, बल्कि इसने राज्य में नशा माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
10 महीने, 29 हजार एफआईआर और टनों नशा
मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के सख्त निर्देशों पर 1 मार्च 2025 से शुरू हुए इस अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने दिन-रात एक कर दिया है। डीजीपी Gaurav Yadav की अगुवाई में चल रहे इस ऑपरेशन में अब तक 1849 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई है। इसके अलावा पुलिस ने 599 किलो अफीम, 272 क्विंटल भुक्की, 51 किलो चरस और 46 लाख से ज्यादा नशीली गोलियां व कैप्सूल जब्त किए हैं। तस्करों के पास से 15.26 करोड़ रुपये की ड्रग मनी (Drug Money) भी बरामद की गई है, जो यह साबित करती है कि यह सिंडिकेट कितना गहरा था।
हर दिन एक्शन: 306वें दिन की कहानी
इस जंग में पुलिस की निरंतरता देखने लायक है। अभियान के 306वें दिन भी राज्य भर में 100 से अधिक पुलिस टीमों ने एक साथ 257 स्थानों पर छापेमारी की। 61 राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) की निगरानी में चले इस ऑपरेशन में एक ही दिन में 49 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से 468 ग्राम हेरोइन और 202 नशीली गोलियां बरामद हुईं। पुलिस ने 271 संदिग्धों की जांच की, जिससे साफ है कि तस्करों को सांस लेने का भी मौका नहीं दिया जा रहा है।
सिर्फ डंडा नहीं, इलाज भी प्राथमिकता
पंजाब सरकार की रणनीति सिर्फ पकड़-धकड़ तक सीमित नहीं है। सरकार ने नशों के खात्मे के लिए तीन-पक्षीय रणनीति अपनाई है – इन्फोर्समेंट (सख्ती), डी-एडिक्शन (नशा मुक्ति) और प्रीवेंशन (बचाव)। इसी ‘डी-एडिक्शन’ पहल के तहत, पुलिस ने आज 21 ऐसे व्यक्तियों की पहचान की जो नशे की गिरफ्त में थे और उन्हें नशा छोड़ने के इलाज और पुनर्वास के लिए राजी किया। यह मानवीय पहलू पुलिस की छवि को बदल रहा है।
विश्लेषण: सप्लाई चेन पर सीधा प्रहार (Expert Analysis)
बीते दशकों में पंजाब ने नशे के कारण अपनी जवानी और किसानी दोनों को बर्बाद होते देखा है। लेकिन पिछले 10 महीनों के आंकड़े बताते हैं कि अब लड़ाई ‘सप्लाई चेन’ को काटने पर केंद्रित है। 1849 किलो हेरोइन की बरामदगी कोई छोटी बात नहीं है; यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में हजारों करोड़ रुपये की चोट है। वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema की अध्यक्षता वाली कैबिनेट सब-कमेटी की निगरानी यह सुनिश्चित कर रही है कि पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल बना रहे। इतनी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां (42,622) यह संकेत देती हैं कि अब ‘छोटी मछली’ से लेकर ‘बड़े मगरमच्छ’ तक कोई भी कानून की पहुंच से दूर नहीं है।
आम जनता पर असर
नशे के खिलाफ इस कार्रवाई से पंजाब के उन हजारों परिवारों में उम्मीद की किरण जगी है, जिनके बच्चे नशे की दलदल में फंस चुके थे। नशा तस्करों के जेल जाने से गलियों और मोहल्लों में नशे की आसान उपलब्धता कम हुई है, जिससे युवा पीढ़ी को बचाने में मदद मिल रही है। 21 लोगों का पुनर्वास के लिए राजी होना बताता है कि समाज सुधार की दिशा में भी काम हो रहा है।
जानें पूरा मामला
पंजाब को ‘नशा मुक्त’ बनाने के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए सीएम मान ने पुलिस को खुली छूट दी थी। इसके तहत राज्य के सभी 28 पुलिस जिलों में रोजाना विशेष ऑपरेशन चलाए जाते हैं। इस पूरी कवायद का मकसद न केवल ड्रग्स पकड़ना है, बल्कि तस्करों की संपत्तियों को कुर्क करना और युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना है।
मुख्य बातें (Key Points)
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Punjab Police ने 10 महीनों में 1849 किलो हेरोइन बरामद की।
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अब तक 42,622 Drug Smugglers गिरफ्तार और 29,351 एफआईआर दर्ज।
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तस्करों से 15.26 Crore रुपये की ड्रग मनी जब्त की गई।
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सरकार की EDP Strategy (इन्फोर्समेंट, डी-एडिक्शन, प्रीवेंशन) कारगर साबित हो रही है।
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एक ही दिन में 49 तस्कर गिरफ्तार और 21 लोगों को Rehabilitation के लिए भेजा गया।








