Missing Saroops Case Update – पंजाब में आस्था और भावनाओं से जुड़े श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के मामले में Punjab and Haryana High Court ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में एक और आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए Punjab Government को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह मामला बेहद संवेदनशील है और कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि इस याचिका पर अब 9 जनवरी को सुनवाई होगी। कोर्ट ने फैसला किया है कि इस केस से जुड़े अन्य आरोपियों की याचिकाओं को भी इसी दिन एक साथ सुना जाएगा, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
मैं तो सिर्फ एक जिल्दसाज था: कुलवंत सिंह
इस मामले में अमृतसर के निवासी Kulwant Singh ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई है। कोर्ट में अपनी दलील पेश करते हुए कुलवंत सिंह के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का कोई पक्का या नियमित कर्मचारी नहीं था। याचिका में दावा किया गया है कि कुलवंत सिंह का पावन स्वरूपों के गायब होने की घटना से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई लेना-देना नहीं है। वह महज एक जिल्दसाज (Book Binder) था, जिसे ठेके (Contract) के आधार पर काम पर रखा गया था।
सियासी दबाव में फंसाने का आरोप
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसने साल 2010 से लेकर 2020 तक जिल्दसाजी का काम किया और उसके बाद उसकी सेवाएं खत्म कर दी गईं। कुलवंत सिंह ने आरोप लगाया है कि उसे राजनीतिक दबाव और रंजिश के चलते इस बड़े मामले में आरोपी बनाया गया है, जबकि उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वह वहां काम करता था। उसने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि वह जांच में पूरा सहयोग करने को तैयार है और जब भी जांच एजेंसियां बुलाएंगी, वह हाजिर हो जाएगा।
हाईकोर्ट की रणनीति: सभी आरोपियों की सुनवाई एक साथ
हाईकोर्ट ने कुलवंत सिंह की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कुलवंत सिंह की याचिका को इस मामले के अन्य दो आरोपियों—परमदीप सिंह और दलबीर सिंह—की पहले से लंबित अग्रिम जमानत याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए। अब इन तीनों मामलों की सुनवाई एक साथ 9 जनवरी को होगी। इससे कोर्ट को पूरे घटनाक्रम को समग्रता से समझने में मदद मिलेगी।
विश्लेषण: न्याय की आस और जांच की दिशा (Expert Analysis)
पावन स्वरूपों के गायब होने का मामला केवल प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था पर सीधा प्रहार है। हाईकोर्ट द्वारा सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं को एक साथ सुनने का फैसला न्यायिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इससे यह साफ होगा कि क्या यह केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की लापरवाही थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। कुलवंत सिंह का यह तर्क कि वह केवल एक ‘जिल्दसाज’ था, जांच एजेंसियों के लिए एक चुनौती है कि वे साबित करें कि स्वरूपों के रखरखाव या गायब होने में उसकी क्या भूमिका थी। अगर कोर्ट को लगता है कि छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, तो जांच की आंच बड़े चेहरों तक भी पहुंच सकती है।
आम संगत पर असर (Human Impact)
गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की गुमशुदगी ने सिख संगत के हृदयों को गहरा आघात पहुंचाया है। हर सुनवाई पर लोगों की नजरें टिकी होती हैं। कोर्ट की हर कार्यवाही से संगत को उम्मीद बंधती है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी, चाहे वे कितने भी रसूखदार क्यों न हों।
जानें पूरा मामला (Background)
यह मामला एसजीपीसी के रिकॉर्ड से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के कम होने या गायब होने से जुड़ा है। यह मुद्दा पंजाब की धार्मिक और राजनीतिक फिजा में काफी समय से छाया हुआ है, जिसमें कई कर्मचारियों पर गाज गिरी थी और अब मामला हाईकोर्ट की दहलीज पर है।
मुख्य बातें (Key Points)
Punjab and Haryana High Court ने 328 स्वरूपों के मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया।
आरोपी कुलवंत सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए Anticipatory Bail की मांग की है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि वह एसजीपीसी में सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट पर Book Binder था।
कोर्ट अब कुलवंत, परमदीप और दलबीर सिंह की याचिकाओं पर 9 January को एक साथ सुनवाई करेगा।
कुलवंत सिंह ने जांच में सहयोग करने और कोर्ट की शर्तें मानने का भरोसा दिया है।








