Indore Bhagirathpura Contaminated Water Death : देश के सबसे स्वच्छ शहर Indore के भागीरथपुरा इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां दूषित पानी (Contaminated Water) पीने से एक 6 महीने के मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद घर में आई खुशियां मातम में बदल गईं। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
10 साल बाद गूंजी थी किलकारी, गंदे पानी ने कर दिया खामोश
इंदौर के भागीरथपुरा स्थित मराठी मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। यहां रहने वाले साहू परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पीड़ित मां साधना साहू का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि उनकी बेटी 10 साल की है और उसके बाद 10 साल की मन्नतों और इंतजार के बाद यह बेटा हुआ था। यह बच्चा घर का चिराग और दादा-दादी के बुढ़ापे का सहारा था, लेकिन दूषित पानी ने उसे हमेशा के लिए उनसे छीन लिया। मां की चीत्कार सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं।
‘दूषित पानी से ही गई जान’: मां का आरोप
बच्चे की मां साधना साहू ने बताया कि उनके घर में नल से दूषित पानी आ रहा था। उनका मानना है कि या तो पानी में मिलाकर पिलाए गए दूध से या फिर मां के दूध (जो दूषित पानी पीने से प्रभावित हुआ हो सकता है) के जरिए संक्रमण बच्चे के शरीर में पहुंचा। बच्चे को अचानक उल्टी और दस्त शुरू हो गए। शुरुआत में इसे सामान्य समझकर स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया और दवाई ली गई, लेकिन हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई।
अस्पताल ले जाते वक्त उखड़ गई सांसें
परिजनों के मुताबिक, बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर वे उसे शहर के निजी अस्पताल (CHL Apollo) लेकर भागे। मां की हालत इतनी खराब थी कि वह बच्चे को ले जाने की स्थिति में नहीं थी, इसलिए दादा-दादी और पिता उसे लेकर गए। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि इंफेक्शन बहुत ज्यादा फैल चुका था।
संपादकीय विश्लेषण: ‘नंबर 1’ शहर के दामन पर दाग
एक वरिष्ठ संपादक के नजरिए से देखें तो यह घटना इंदौर नगर निगम (Indore Municipal Corporation) के दावों की पोल खोलती है। जो शहर सफाई में पूरे देश में नंबर 1 होने का गौरव रखता हो, वहां के रिहायशी इलाकों में अगर जहरीला और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही है। क्या प्रशासन केवल सड़कों की सफाई पर ध्यान दे रहा है और बुनियादी जलापूर्ति (Water Supply) की गुणवत्ता को नजरअंदाज कर रहा है? इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
आम आदमी पर असर
इस घटना ने भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों के लोगों में दहशत पैदा कर दी है। लोग अब नल का पानी पीने से भी डर रहे हैं। छोटे बच्चों वाले परिवारों में संक्रमण को लेकर खौफ का माहौल है। यह घटना चेतावनी है कि बरसात और मौसम बदलाव के दौरान पानी उबालकर ही पीना चाहिए।
जानें पूरा मामला
क्या है पृष्ठभूमि: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ समय से गंदे पानी की शिकायतें मिल रही थीं। साहू परिवार के 6 माह के बच्चे को उल्टी-दस्त हुए। स्थानीय इलाज के बाद भी जब राहत नहीं मिली, तो उसे बड़े अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है कि जलजनित संक्रमण (Waterborne Infection) ही मौत का कारण है।








