PM Modi Letter to Tarique Rahman: बांग्लादेश में जारी उथल-पुथल और हिंदुओं पर हो रहे हमलों के बीच भारत ने एक सधी हुई कूटनीतिक चाल चली है। 31 दिसंबर को ढाका में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उनके बेटे और बीएनपी (BNP) नेता तारिक रहमान से अहम मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक विशेष पत्र सौंपा, जिसने न केवल शोक व्यक्त किया बल्कि भविष्य के रिश्तों की नई इबारत भी लिख दी।
ढाका में जयशंकर: शोक भी, संदेश भी
बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और देश की पहली महिला पीएम खालिदा जिया को 31 दिसंबर को राजकीय सम्मान के साथ ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मौके पर हजारों की भीड़ और विदेशी प्रतिनिधियों के बीच भारत की मौजूदगी सबसे खास रही। विदेश मंत्री एस जयशंकर न केवल अंतिम संस्कार में शामिल हुए, बल्कि उन्होंने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से निजी मुलाकात भी की। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह मुलाकात महज औपचारिक नहीं थी, बल्कि फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले भारत की बदलती रणनीति का हिस्सा है।
पीएम मोदी ने चिट्ठी में क्या लिखा?
तारिक रहमान को सौंपे गए पत्र में पीएम मोदी ने बेहद आत्मीयता से शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “प्रिय तारिक रहमान साहब, आपकी मां और पूर्व पीएम खालिदा जिया के निधन की खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”
पीएम मोदी ने अपनी यादें ताजा करते हुए लिखा, “मुझे जून 2015 में ढाका में बेगम साहिबा से हुई मुलाकात आज भी याद है। वे अदम्य संकल्प वाली असाधारण नेता थीं। उन्होंने न केवल बांग्लादेश के विकास में योगदान दिया, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।”
पत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह था जहां पीएम मोदी ने भविष्य की ओर इशारा किया। उन्होंने लिखा, “मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके सक्षम नेतृत्व में बीएनपी (BNP) उनके आदर्शों को आगे बढ़ाएगी और भारत-बांग्लादेश के ऐतिहासिक रिश्तों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।”
‘इंगेज एंड इन्फ्लुएंस’: भारत की नई रणनीति
इस दौरे और चिट्ठी के गहरे मायने हैं। तारिक रहमान को बांग्लादेश का अगला संभावित प्रधानमंत्री माना जा रहा है। ऐसे में भारत ने ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) की जगह ‘इंगेज एंड इन्फ्लुएंस’ (Engage and Influence) की नीति अपना ली है। भारत यह साफ संदेश देना चाहता है कि ढाका में सत्ता चाहे किसी की भी हो, भारत एक भरोसेमंद पड़ोसी बना रहेगा। यह कदम चीन और पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भी अहम है, जो ढाका में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंदुओं की सुरक्षा और सत्ता परिवर्तन
संपादकीय विश्लेषण: एक वरिष्ठ संपादक के नजरिए से देखें तो जयशंकर का यह दौरा एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के बीच, भारत ने भविष्य की सत्ता (तारिक रहमान) के साथ संवाद के दरवाजे खोल दिए हैं। पीएम मोदी का यह पत्र सिर्फ संवेदना नहीं, बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश है कि भारत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर नई सरकार से सहयोग की उम्मीद करता है। यह भारत की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।
आम पाठक पर असर
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सीधे तौर पर सीमा सुरक्षा, व्यापार और वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों को प्रभावित करते हैं। अगर भारत नई सरकार के साथ अच्छे रिश्ते बनाने में सफल होता है, तो सीमा पार से घुसपैठ और आतंकवाद जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी, जिसका सीधा असर भारत की आंतरिक सुरक्षा और आम आदमी के जीवन पर पड़ेगा।
जानें पूरा मामला
क्या है पृष्ठभूमि: 80 वर्षीय खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख थीं। 1990 के दशक में उनके कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे थे। हालांकि, 2015 में पीएम मोदी की ढाका यात्रा ने रिश्तों को नया मोड़ दिया था। अब उनके निधन के बाद, उनके बेटे तारिक रहमान पार्टी की कमान संभाल रहे हैं और फरवरी में होने वाले आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
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S Jaishankar ने ढाका में खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया।
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विदेश मंत्री ने Tarique Rahman से मुलाकात कर पीएम मोदी का पत्र सौंपा।
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पीएम मोदी ने पत्र में Khaleda Zia के नेतृत्व और भारत-बांग्लादेश रिश्तों में उनके योगदान को याद किया।
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भारत ने तारिक रहमान के नेतृत्व में रिश्तों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई।
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यह कदम भारत की Engage and Influence नीति का हिस्सा है ताकि चीन-पाक के प्रभाव को कम किया जा सके।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न








