Vaishno Devi Yatra Rules – नए साल की शुरुआत से पहले माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और भवन पर होने वाली अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अब ‘समय सीमा’ (Time Limit) का नया फॉर्मूला लागू कर दिया गया है। इन नए नियमों के तहत, अब यात्रियों को आरएफआईडी (RFID) कार्ड लेने के 10 घंटे के भीतर यात्रा शुरू करनी होगी और 24 घंटे के अंदर दर्शन कर वापस बाणगंगा चेक पोस्ट पार करना अनिवार्य होगा।
10 घंटे में शुरू करनी होगी चढ़ाई
श्राइन बोर्ड प्रशासन द्वारा लिए गए फैसले के मुताबिक, जैसे ही कोई श्रद्धालु कटरा से अपना आरएफआईडी कार्ड प्राप्त करेगा, उसके अगले 10 घंटे के भीतर उसे अपनी यात्रा शुरू करनी होगी। यदि कोई भक्त कार्ड लेने के बाद निर्धारित समय में यात्रा शुरू नहीं करता है, तो उसका कार्ड अमान्य माना जा सकता है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि कटरा में भक्तों की भीड़ जमा न हो और यात्रा का प्रवाह सुचारू रूप से चलता रहे।
24 घंटे के अंदर वापसी अनिवार्य
यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) के लिए एक और कड़ा नियम बनाया गया है। अब श्रद्धालुओं को दर्शनी गेट से अपनी यात्रा शुरू करने के बाद, माता के दर्शन कर अगले 24 घंटे के भीतर वापस बाणगंगा चेक पोस्ट को क्रॉस करना होगा। प्रशासन का मानना है कि कई बार श्रद्धालु ऊपर भवन या अन्य स्थानों पर 2-3 दिनों तक रुके रहते हैं, जिससे वहां क्षमता से अधिक भीड़ हो जाती है और प्रबंधन में भारी दिक्कतें आती हैं।
भक्तों ने फैसले का किया स्वागत
हैरानी की बात यह है कि श्राइन बोर्ड के इस कड़े फैसले का श्रद्धालुओं ने भी दिल खोलकर स्वागत किया है। छत्तीसगढ़ से आए भक्तों का कहना है कि 24 घंटे का समय दर्शन करके वापस आने के लिए पर्याप्त है। भक्तों का मानना है कि इस नियम से उन लोगों को बहुत सुविधा होगी जो समय की कमी के कारण जल्दी यात्रा पूरी करना चाहते हैं, साथ ही बुजुर्गों और नौकरीपेशा लोगों के लिए भी व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो जाएगी।
सुविधाओं में विस्तार और सुरक्षा पर जोर
श्राइन बोर्ड प्रशासन का कहना है कि नई सुविधाओं और बेहतर व्यवस्थाओं के कारण अब यात्रा करना पहले से काफी आसान हो गया है। भक्तों को रास्ते में खाने-पीने और रहने की उत्तम व्यवस्था मिल रही है। 24 घंटे की समय सीमा लागू होने से ऊपर भवन पर भक्तों का जमावड़ा कम होगा, जिससे सुरक्षा कर्मियों को स्थिति संभालने में आसानी होगी। भक्तों ने सरकार से और अधिक चेक पॉइंट्स बनाने की भी अपील की है ताकि वे यात्रा के दौरान नए रास्तों को भी एक्सप्लोर कर सकें।
विश्लेषण: हादसों से सबक और बेहतर प्रबंधन (Expert Analysis)
वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का यह फैसला अतीत में हुई भीड़भाड़ और भगदड़ जैसी अप्रिय घटनाओं से सबक लेकर उठाया गया एक सराहनीय कदम है। अक्सर देखा गया है कि विशेष अवसरों (जैसे नया साल या नवरात्रि) पर भवन की क्षमता से कई गुना अधिक लोग वहां पहुंच जाते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से एक “टिकिंग टाइम बम” (Ticking Time Bomb) जैसा होता है। 24 घंटे की डेडलाइन तय करने से यात्रियों का रोटेशन (Rotation) बना रहेगा, जिससे किसी एक स्थान पर दबाव नहीं बढ़ेगा। हालांकि, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि कोई यात्री स्वास्थ्य कारणों या मौसम की खराबी के कारण लेट हो जाता है, तो उसके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए। यह नियम डिजिटल ट्रैकिंग (RFID) के युग में भीड़ प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सकता है।
जानें पूरा मामला (Background)
माता वैष्णो देवी की यात्रा में आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य होने के बाद से ही प्रशासन डेटा के जरिए भीड़ पर नजर रख रहा है। 31 दिसंबर के करीब आने के साथ ही लाखों भक्त कटरा पहुंचते हैं। इसी भारी भीड़ को देखते हुए बोर्ड ने समय प्रबंधन का यह नया ढांचा तैयार किया है ताकि हर भक्त को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से दर्शन मिल सकें।
मुख्य बातें (Key Points)
RFID Card मिलने के 10 घंटे के भीतर यात्रा शुरू करना अब अनिवार्य है।
यात्रा शुरू करने के 24 घंटे के भीतर दर्शन कर बाणगंगा वापस लौटना होगा।
भीड़भाड़ कम करने और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए लिया गया फैसला।
श्रद्धालुओं के अनुसार 24 घंटे का समय दर्शन के लिए पर्याप्त है।
बोर्ड का लक्ष्य भवन पर भक्तों के अनावश्यक ठहराव को रोकना है।








