Pakistan Water Crisis भारत के बाद अब अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान की घेराबंदी शुरू कर दी है, जिससे कंगाल पाकिस्तान के सामने अब प्यास बुझाने का भी संकट खड़ा हो गया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कुनार नदी के पानी को मोड़ने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो सीधे तौर पर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पश्चिमी इलाकों की जीवनरेखा को काट देगा।
पाकिस्तान इस समय चौतरफा मार झेल रहा है। एक तरफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित कर पाकिस्तान की सप्लाई लाइन पर चोट की है, तो दूसरी तरफ अब अफगानिस्तान ने कुनार नदी का रुख मोड़कर पाकिस्तान को ‘जल युद्ध’ में धकेल दिया है। कुनार नदी पाकिस्तान के चितराल से निकलकर अफगानिस्तान जाती है और फिर वापस पाकिस्तान लौटकर सिंधु नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है। तालिबान सरकार अब इस पानी को नंगरहार क्षेत्र की ओर मोड़ने के लिए बांध बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।
‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’
भारत ने पहले ही साफ कर दिया था कि आतंकवाद और जल समझौता साथ-साथ नहीं चल सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसी कड़े रुख के बाद अब अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान को उसकी नापाक हरकतों का करारा जवाब दिया है। अक्टूबर में काबुल पर हुए कथित पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। तालिबान लड़ाकों ने न केवल सीमा पार कार्रवाई की, बल्कि अब वे पाकिस्तान को आर्थिक और सामाजिक रूप से पंगु बनाने के लिए पानी के हथियार का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्यों अहम है कुनार नदी का पानी?
करीब 480 किलोमीटर लंबी यह नदी पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के लिए सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन का मुख्य स्रोत है। यदि अफगानिस्तान इस नदी पर बांध बनाकर पानी का रुख मोड़ देता है, तो पाकिस्तान का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में आ जाएगा। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारत के साथ तो पाकिस्तान की सिंधु जल संधि है, लेकिन अफगानिस्तान के साथ पानी के बंटवारे को लेकर कोई लिखित समझौता या संधि नहीं है। इसका मतलब है कि अफगानिस्तान कानूनी रूप से इस पानी को रोकने के लिए स्वतंत्र है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नहीं फैला पाएगा झोली
पाकिस्तान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाकर रोना रोता है, लेकिन इस मामले में वह लाचार नजर आ रहा है। बिना किसी संधि के वह किसी भी वैश्विक अदालत में अफगानिस्तान को चुनौती नहीं दे सकता। अफगानिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनका संप्रभु अधिकार है और वे अपनी कृषि भूमि को सींचने के लिए अपने संसाधनों का उपयोग करेंगे। पाकिस्तान के लिए अब यह अस्तित्व की लड़ाई बन गई है क्योंकि बिना पानी के उसकी खेती और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
आम पाठक पर असर
पाकिस्तान में पैदा होने वाला यह जल संकट न केवल वहां की जनता को प्यासा रखेगा, बल्कि अनाज की कमी और बिजली संकट के कारण महंगाई को और बढ़ा देगा, जिसका सीधा असर वहां की गरीब जनता पर पड़ेगा।
क्या है पृष्ठभूमि
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन और आतंकवाद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। हाल के दिनों में सीमा पर झड़पें बढ़ी हैं और पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों ने आग में घी डालने का काम किया है। तालिबान सरकार अब पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे रही है, जिससे दक्षिण एशिया का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।
मुख्य बातें (Key Points)
तालिबान का बड़ा फैसला: अफगानिस्तान ने कुनार नदी का पानी नंगरहार की तरफ मोड़ने के लिए बांध परियोजना को मंजूरी दे दी है।
कोई संधि नहीं: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जल बंटवारे को लेकर कोई कानूनी संधि नहीं है, जिससे पाकिस्तान बेबस है।
चौतरफा संकट: भारत द्वारा सिंधु जल संधि रोकने के बाद अब कुनार नदी का संकट पाकिस्तान को बूंद-बूंद के लिए तरसाएगा।
खेती और बिजली पर खतरा: पानी रुकने से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में सिंचाई और बिजली उत्पादन ठप हो सकता है।








