Banke Bihari Temple Vrindavan: वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। सोमवार को मंदिर में सदियों पुरानी एक महत्वपूर्ण परंपरा टूट गई। वेतन (सैलरी) न मिलने से नाराज मंदिर के हलवाई ने ठाकुर जी के लिए भोग तैयार नहीं किया, जिसके चलते ‘बांके बिहारी जी’ को पूरे दिन भूखा रहना पड़ा।
इस घटना के बाद से मंदिर के गोस्वामी परिवार और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश और नाराजगी है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस कुप्रबंधन की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी को दिन में कई बार नियमानुसार भोग लगाया जाता है। यह परंपरा मंदिर के इतिहास जितनी ही पुरानी है। लेकिन सोमवार को यह क्रम टूट गया। भोग तैयार करने की जिम्मेदारी जिस हलवाई पर थी, उसने प्रसाद बनाने से इनकार कर दिया।
जब हलवाई से जवाबदेही मांगी गई, तो उसने स्पष्ट किया कि उसे लंबे समय से उसकी सैलरी नहीं मिली है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे हलवाई का कहना था कि वह लगातार अपनी हक की कमाई मांग रहा था, लेकिन मैनेजमेंट की तरफ से कोई सुनवाई नहीं हुई।
मैनेजमेंट में बदलाव बनी वजह?
मंदिर के गोस्वामी समाज ने भी इस बात की पुष्टि की है। उनका कहना है कि मंदिर के मैनेजमेंट में पिछले कुछ समय से कई बदलाव हुए हैं, जिसकी वजह से वेतन मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। गोस्वामी समाज के लोगों ने बताया कि हलवाई की आर्थिक स्थिति खराब होने पर उन्होंने अपने स्तर पर कई बार उसकी मदद की थी, लेकिन सैलरी मिलना उसका अधिकार है।
गोस्वामी समाज इस बात से बेहद खफा है कि एक प्रबंधन संबंधी समस्या (Managerial Problem) की वजह से भगवान को भूखा रहना पड़ा। उनका कहना है कि यह आस्था के साथ खिलवाड़ है।
श्रद्धालुओं में नाराजगी, प्रशासन करेगा जांच
इस घटना की खबर फैलते ही श्रद्धालुओं में भारी नाराजगी देखी गई। सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें भक्त इस घटना पर दुख और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति भगवान की सेवा में लगा है, उसे उसकी मेहनत का फल न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब प्रशासनिक जांच की बात कही जा रही है। यह जांच की जाएगी कि आखिर सैलरी में देरी क्यों हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। यह भी देखा जाएगा कि मंदिर में प्रसाद बनने की प्रक्रिया की निगरानी कौन करता है और इस बड़ी चूक के लिए किसकी जवाबदेही तय होगी।
आम पाठक पर असर (Human Impact)
यह खबर सिर्फ एक मंदिर की नहीं, बल्कि आस्था और व्यवस्था के बीच के संघर्ष की है। एक तरफ लाखों भक्तों की श्रद्धा है, तो दूसरी तरफ एक कर्मचारी की बुनियादी जरूरतें। जब प्रबंधन की विफलता के कारण भगवान की सेवा बाधित होती है, तो यह हर श्रद्धालु के मन को चोट पहुंचाती है। साथ ही, यह घटना इस बात पर भी सवाल उठाती है कि धार्मिक स्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
परंपरा टूटी: वेतन न मिलने पर हलवाई ने बांके बिहारी मंदिर में भोग नहीं बनाया।
भगवान रहे भूखे: सोमवार को ठाकुर जी को दिन भर भोग नहीं लग सका।
नाराजगी: गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं में प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
वजह: मंदिर मैनेजमेंट में हुए बदलावों को सैलरी न मिलने का कारण बताया जा रहा है।
जांच: प्रशासन इस मामले की जांच करेगा और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी।








