Supreme Court News कल ही देश ने संविधान दिवस मनाया है और आज सुप्रीम कोर्ट से आम आदमी की जिंदगी, सांसों और अधिकारों को लेकर कुछ बेहद अहम टिप्पणियां सामने आई हैं। देश के नए चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने दिल्ली के जानलेवा प्रदूषण पर अपनी निजी पीड़ा साझा करते हुए सिस्टम की लाचारी को उजागर कर दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे देश के सबसे सुरक्षित और हरे-भरे इलाके में टहलने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण, वोटर लिस्ट और आधार कार्ड को लेकर जो बातें कही हैं, वे हर नागरिक के लिए जानना जरूरी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि समस्याओं के समाधान के लिए उनके पास कोई ‘जादुई छड़ी’ नहीं है, लेकिन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए वे प्रतिबद्ध हैं।
‘प्रदूषण से CJI की तबीयत बिगड़ी’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बताया कि मंगलवार शाम को वे दिल्ली में सिर्फ एक घंटा टहले थे, जिसके बाद प्रदूषण की वजह से उनकी तबीयत खराब हो गई। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ टहलता ही तो हूं, अब यह भी मुश्किल हो गया है।” गौरतलब है कि चीफ जस्टिस का आवास दिल्ली के एनडीएमसी इलाके में है, जो राजधानी का सबसे हरा-भरा क्षेत्र माना जाता है। अगर वहां यह हाल है, तो आम दिल्लीवासी किस हाल में जी रहे होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
‘कोर्ट के पास नहीं है जादू की छड़ी’
प्रदूषण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़वा सच स्वीकार किया। चीफ जस्टिस ने कहा, “किसी भी ज्यूडिशियल फोरम के पास कौन सी जादू की छड़ी है जिसे घुमाकर यह समस्या खत्म की जा सके?” कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर के लिए यह खतरनाक वक्त है, लेकिन जजों को यह बताया जाए कि वे क्या आदेश दें जिससे हवा तुरंत साफ हो जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण के कई कारण हैं और इसका हल एक्सपर्ट्स और साइंटिस्ट ही निकाल सकते हैं।
‘आधार कार्ड से वोटिंग अधिकार पर सवाल’
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और घुसपैठियों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बहुत बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या दूसरे देश से आया कोई शख्स अगर आधार कार्ड बनवा लेता है, तो उसे वोटिंग का पावर मिल जाना चाहिए? कोर्ट ने साफ किया कि आधार कार्ड सिर्फ सरकारी योजनाओं और लाभ के लिए है, यह आपकी पहचान से जुड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आपको वोट देने का अधिकार भी मिल जाए।
’22 दिनों में 25 बीएलओ की मौत’
वोटर लिस्ट के काम में लगे बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की मौत का आंकड़ा डराने वाला है। वीडियो में दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले 22 दिनों में काम के दबाव के चलते 25 बीएलओ की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश में 9, गुजरात और यूपी में 4-4, और बंगाल-राजस्थान में 3-3 मौतें हुई हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक संवैधानिक संस्था मानते हुए कहा कि वह कोई पोस्ट ऑफिस नहीं है, उसके पास दस्तावेजों की सत्यता जांचने का पूरा वैधानिक अधिकार है।
‘नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी की वकालत’
चीफ जस्टिस ने देश की न्याय प्रणाली में एकरूपता लाने के लिए ‘नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी’ की वकालत की है। उनका कहना है कि देश में 25 हाई कोर्ट हैं और अलग-अलग बेंच एक ही तरह के केस में अलग-अलग राय रखती हैं। इसलिए एक ऐसी पॉलिसी होनी चाहिए जिससे लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसी एक केस को लेकर फैसला एक सरीखा रहे। इसे ‘वन कंट्री, वन डिसीजन’ की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।
‘जिम्मेदार समाज बनाने की जरूरत’
अश्लीलता के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि हमें एक ‘रिस्पॉन्सिबल सोसाइटी’ बनानी होगी। विडंबना यह है कि एक तरफ कोर्ट आधार को वोटिंग का आधार नहीं मानता, वहीं दूसरी तरफ नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर उम्र की पुष्टि के लिए आधार के इस्तेमाल का सुझाव भी चर्चा में आया।
‘जानें पूरा मामला’
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है, जिसके चलते GRAP-3 की पाबंदियां और वर्क फ्रॉम होम लागू थे, जिन्हें हाल ही में हटा लिया गया है। इसी बीच 24 नवंबर को शपथ लेने वाले नए सीजेआई सूर्यकांत ने प्रदूषण, वोटर लिस्ट में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और न्यायपालिका की नीतियों पर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। वे 2018 के जजों के विवाद से लेकर पेगासस और आर्टिकल 370 जैसे बड़े फैसलों का हिस्सा रहे हैं।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि प्रदूषण के कारण दिल्ली में एक घंटा टहलने से उनकी तबीयत बिगड़ गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण खत्म करने के लिए उनके पास कोई ‘जादुई छड़ी’ नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड होने से किसी घुसपैठिए को वोटिंग का अधिकार नहीं मिल सकता।
सीजेआई ने पूरे देश के लिए एक समान ‘नेशनल ज्यूडिशियल पॉलिसी’ बनाने की बात कही।








