Punjab Congress : पंजाब कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी हाईकमान ने मंगलवार देर रात 27 नए जिला अध्यक्षों की सूची जारी की, जिसमें अनुभव और युवा जोश का एक बड़ा संतुलन साधने की कोशिश की गई है। इस फेरबदल को पार्टी में नई जान फूंकने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है।
यह फेरबदल काफी लंबे इंतजार के बाद हुआ है और इसे 2027 के ‘मिशन पंजाब’ के लिए पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूची को अंतिम रूप देने से पहले पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ कई दौर की बैठकें कीं।
हर जिले से अध्यक्ष पद के लिए तीन से चार नामों का पैनल भेजा गया था, जिस पर गहन मंथन के बाद हाईकमान ने इन 27 चेहरों पर मुहर लगाई है।
अनुभवी और युवा चेहरों का संतुलन
इस नई टीम में पार्टी ने एक सधा हुआ कदम उठाया है। इसमें जहां कई मौजूदा और पूर्व विधायकों को कमान सौंपकर उनके अनुभव पर भरोसा जताया गया है, वहीं कई जिलों में बिल्कुल नए और युवा चेहरों को मौका देकर भविष्य की राजनीति का संकेत भी दिया है।
यह फेरबदल उस प्रक्रिया का हिस्सा है जो पहले ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ शुरू हुई थी। अब जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद संगठन की जमीनी टीम लगभग तैयार हो गई है।
जानें किन चेहरों को मिली कमान
पार्टी ने लगभग हर जिले में एक मजबूत चेहरे को जिम्मेदारी दी है। अमृतसर देहाती से पूर्व विधायक सुखविंदर सिंह डैनी वडाला को अध्यक्ष बनाया गया है। डैनी को एक जुझारू नेता माना जाता है और उनकी नियुक्ति से ग्रामीण क्षेत्र में पार्टी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वहीं, अमृतसर शहरी की कमान सौरभ मैदान को सौंपी गई है, जो पहले पार्षद रह चुके हैं और एक समय में नवजोत सिंह सिद्धू के बेहद खास माने जाते थे।
मौजूदा विधायकों पर भी बड़ा दांव
पार्टी ने अपने कुछ मौजूदा विधायकों पर भी भरोसा जताया है। बरनाला से मौजूदा विधायक कुलदीप सिंह काला को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। यह वही कुलदीप सिंह काला हैं जिन्होंने बरनाला उपचुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की थी।
उस समय हुई चार विधानसभा उपचुनावों में से कांग्रेस को मिली यह एकमात्र जीत थी, जिसका इनाम उन्हें अब संगठन में बड़ी जिम्मेदारी के रूप में मिला है।
इसी तरह, गुरदासपुर से दो बार के विधायक बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा को फिर से जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
कपूरथला से भी मौजूदा विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल को अध्यक्ष बनाया गया है। इन नियुक्तियों से पार्टी ने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत से हटकर ‘जीतने की क्षमता’ को प्राथमिकता दी है।
पूर्व विधायकों को भी मिली अहम जिम्मेदारी
नई सूची में कई पूर्व विधायकों को भी जगह मिली है, ताकि उनके संगठनात्मक अनुभव का लाभ उठाया जा सके। बठिंडा देहाती से 2017 में विधायक रहे प्रीतम सिंह कोट भाई को अध्यक्ष बनाया गया है।
फिरोजपुर में तेज-तर्रार नेता और पूर्व विधायक कुलबीर सिंह जीरा को फिर से प्रधानगी सौंपी गई है। खन्ना से पूर्व विधायक लखबीर सिंह लक्खा और लुधियाना शहरी से 2017 में विधायक रहे संजीव तलवार को भी जिला अध्यक्ष बनाया गया है।
फरीदकोट से नवरूप सिंह बराड़, फतेहगढ़ साहिब से सुरिंदर सिंह और फाजिल्का से हरप्रीत सिंह सिद्धू को कमान सौंपी गई है।
युवा चेहरों पर कांग्रेस का फोकस
इस फेरबदल की सबसे खास बात युवाओं पर जताया गया भरोसा है। होशियारपुर से एक युवा चेहरे दलजीत सिंह गिलजियां को जिला अध्यक्ष बनाया गया है।
वीडियो में दी गई जानकारी के मुताबिक, सूची में शामिल ज्यादातर अध्यक्षों की उम्र 40 से 45 साल के बीच है।
चाहे वह डैनी वडाला हों, कुलबीर जीरा हों, बरिंदरमीत पाहड़ा हों या दलजीत गिलजियां, ये सभी नेता युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह 2027 में आम आदमी पार्टी के युवा वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है।
नई नियुक्तियों की पूरी सूची
जालंधर शहरी से वरिष्ठ नेता राजिंदर बेरी को जिम्मेदारी मिली है, वहीं जालंधर देहाती से हरदीप सिंह लाडो शेरी को अध्यक्ष बनाया गया है। लुधियाना देहाती से मेजर सिंह मुल्लांपुर को कमान सौंपी गई है।
मोगा से हरी सिंह, मोहाली से कमल किशोर शर्मा, मुक्तसर से शुभदीप सिंह बिट्टू और पठानकोट से पन्ना लाल भाटिया को अध्यक्ष बनाया गया है।
पटियाला देहाती से गुरशरण कौर रंधावा को जिम्मेदारी दी गई है, जो इस 27 की सूची में एकमात्र महिला अध्यक्ष हैं।
पटियाला शहरी से नरेश कुमार दुग्गल, रोपड़ से अश्वनी शर्मा, संगरूर से जगदेव सिंह और नवांशहर से अजय कुमार को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। तरनतारन की कमान राजवीर सिंह भुल्लर को सौंपी गई है।
क्या 2027 का टिकट पक्का?
इन नियुक्तियों के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जिला अध्यक्ष बनने वाले इन नेताओं को 2027 में विधानसभा का टिकट मिलना तय है?
विश्लेषण के मुताबिक, जो मौजूदा विधायक हैं, जैसे कुलदीप काला और बरिंदरमीत पाहड़ा, उनकी दावेदारी तो मजबूत है ही।
लेकिन जो पूर्व विधायक (जैसे कुलबीर जीरा, लखबीर लक्खा, संजीव तलवार, डैनी वडाला) हैं, उन्हें जिला अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि अगर वे संगठन को मजबूत करते हैं और अच्छी परफॉर्मेंस देते हैं, तो 2027 में उनकी दावेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
पहले के समय में जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष की सिफारिश पर ही एमएलए की टिकटें मिलती थीं, लेकिन बाद में यह परंपरा टूट गई और अध्यक्ष खुद ही टिकट लेने लगे, जिससे पार्टी कमजोर हुई। अब एक बार फिर पार्टी संगठन को मजबूत कर उसी पुरानी राह पर लौटने की कोशिश कर रही है।
एक ही महिला को क्यों मिली जगह?
पूरी सूची में एकमात्र महिला चेहरे का होना भी चर्चा का विषय है। पटियाला देहाती से गुरशरण कौर रंधावा को अध्यक्ष बनाया गया है।
यह सवाल उठ रहा है कि ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाली कांग्रेस ने 27 जिलों में से सिर्फ एक में ही महिला को कमान क्यों दी। हालांकि, यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में उन्हें पटियाला के किसी हलके से टिकट देकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है।
परिवारवाद से दूरी बनाने की कोशिश
वीडियो में दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार की नियुक्तियों में परिवारवाद से काफी हद तक दूरी बनाई गई है।
कांग्रेस के कई बड़े और ‘खुंड’ (पुराने) नेता अपने बेटों या भतीजों के लिए लॉबिंग कर रहे थे, लेकिन हाईकमान ने ज्यादातर मेहनती और जमीनी कार्यकर्ताओं को ही तरजीह दी है।
यह फैसला पार्टी के आम कार्यकर्ता में एक सकारात्मक संदेश देगा कि मेहनत करने वालों को जिम्मेदारी जरूर मिलती है।
क्या राजा वड़िंग बने रहेंगे 2027 तक प्रधान?
जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग 2027 तक प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे?
वीडियो के विश्लेषण के मुताबिक, राजा वड़िंग का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है और हाल के दिनों में वह कुछ विवादों में भी रहे हैं।
ऐसे में हाईकमान यह फैसला ले सकता है कि 2027 का चुनाव किसी नए चेहरे के नेतृत्व में लड़ा जाए।
प्रदेश अध्यक्ष की रेस में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और विजय इंदर सिंगला जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं।
कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ की लड़ाई
यह फेरबदल कांग्रेस के लिए सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि यह 2027 में पंजाब में ‘करो या मरो’ की लड़ाई की तैयारी है।
पंजाब देश के उन गिने-चुने राज्यों में से है, जहां कांग्रेस आज भी मुख्य विपक्षी दल है और सत्ता में वापसी की उम्मीद रखती है।
अगर कांग्रेस 2027 में पंजाब में वापसी नहीं कर पाती, तो उसका हाल भी उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और हरियाणा जैसा हो सकता है, जहां पार्टी लगभग खत्म हो चुकी है।
इन राज्यों में 15 से 20 साल हो गए हैं और कांग्रेस वापसी नहीं कर पाई है। इसलिए, हाईकमान पंजाब को लेकर कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहता और 2027 के लिए एक मजबूत और जुझारू टीम तैयार कर रहा है।
इन नए अध्यक्षों की नियुक्ति उसी दिशा में उठाया गया पहला बड़ा और निर्णायक कदम है।
‘क्यों अहम है यह फेरबदल?’
2022 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के हाथों मिली करारी हार के बाद पंजाब कांग्रेस बिखर सी गई थी। पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर थी और कार्यकर्ता निराश था। यह संगठनात्मक फेरबदल उस निराशा को दूर करने और पार्टी में एक नई जान फूंकने के लिए बेहद ज़रूरी था। 2027 में AAP की सरकार और बीजेपी-अकाली दल के संभावित गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को एक मजबूत जमीनी संगठन की ज़रूरत है, जिसकी नींव इन 27 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ रखी गई है।
मुख्य बातें (Key Points):
- पंजाब कांग्रेस ने 2027 चुनावों की तैयारी के लिए 27 नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है।
- सूची में मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक और नए युवा चेहरों को शामिल कर संतुलन साधा गया है।
- ज्यादातर अध्यक्ष 40-45 वर्ष की आयु के हैं, जो पार्टी के युवा फोकस को दर्शाता है।
- 27 अध्यक्षों की सूची में पटियाला देहाती से गुरशरण कौर रंधावा एकमात्र महिला हैं।








