RSS Registration Controversy : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्टर्ड संगठन न होने का मुद्दा एक बार फिर सियासी गलियारों में गूंज रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार इस पर सवाल उठाते रहे हैं। अब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि संघ गैरकानूनी नहीं है और उसे रजिस्ट्रेशन की कोई जरूरत नहीं है।
भागवत ने कहा, “संघ संविधान के दायरे में काम करता है। 1925 में जब स्थापना हुई थी, तो क्या हम ब्रिटिश सरकार से रजिस्ट्रेशन कराते? हिंदू धर्म भी तो पंजीकृत नहीं है, फिर भी हमारे जीवन में मौजूद है।” उन्होंने कहा कि आजादी के बाद गैर-पंजीकृत संगठनों को भी ‘व्यक्तियों के समूह’ के रूप में कानूनी दर्जा मिला है और संघ उसी श्रेणी में आता है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’
कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने भागवत के बयान को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ करार दिया। उन्होंने पूछा, “अगर संघ सबसे बड़ा संगठन है, तो उसके सदस्यों की सूची और फंडिंग के रिकॉर्ड कहां हैं? हर संस्था को संविधान के तहत जवाबदेह होना चाहिए।”
रजिस्ट्रेशन न होने के नुकसान क्या हैं?
गैर-पंजीकृत संगठनों (Non-registered organizations) के लिए कई कानूनी सीमाएं होती हैं:
- संपत्ति: वे अपने नाम पर संपत्ति नहीं खरीद सकते।
- बैंक खाता: बिना रजिस्ट्रेशन के संगठन के नाम पर बैंक खाता नहीं खुलता।
- कानूनी मान्यता: इनकी अलग से कोई कानूनी पहचान (Legal Entity) नहीं होती।
- चंदा और टैक्स छूट: ये न तो विदेशी चंदा ले सकते हैं और न ही टैक्स में छूट का दावा कर सकते हैं।
- जवाबदेही: रजिस्टर्ड संस्थाओं की तरह ये सरकार के प्रति सीधे जवाबदेह नहीं होते।
कैसे होता है रजिस्ट्रेशन?
भारत में किसी भी संस्था का रजिस्ट्रेशन ‘सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860’ के तहत होता है। इसके लिए संस्था को अपने उद्देश्य बताने होते हैं और ‘बायलॉज’ (नियम) तैयार करने होते हैं। रजिस्टर्ड संस्थाओं को अपनी आय-व्यय और सदस्यता का पूरा हिसाब सरकार को देना अनिवार्य होता है, जबकि गैर-पंजीकृत संस्थाओं पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती।
मुख्य बातें (Key Points):
- मोहन भागवत ने कहा कि RSS गैरकानूनी नहीं है और उसे रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है।
- कांग्रेस ने इसे झूठ बताते हुए संघ की फंडिंग और सदस्यता के रिकॉर्ड मांगे हैं।
- गैर-पंजीकृत संगठन अपने नाम पर संपत्ति नहीं रख सकते और न ही बैंक खाता खोल सकते हैं।
- भारत में संस्थाओं का पंजीकरण ‘सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860’ के तहत होता है।








