Shashi Tharoor Advani Tweet : कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की राजनीतिक विरासत का खुलकर समर्थन किया है। थरूर ने आडवाणी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से करते हुए कहा कि किसी एक घटना से किसी नेता का पूरा मूल्यांकन नहीं होना चाहिए।
थरूर ने यह बयान तब दिया, जब उन्होंने 8 नवंबर को आडवाणी को उनके 98वें जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर आडवाणी को “सच्चा राजनेता” बताया, जिसकी लोक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता अनुकरणीय है।
Wishing the venerable Shri L.K. Advani a very happy 98th birthday! His unwavering commitment to public service, his modesty & decency, and his role in shaping the trajectory of modern India are indelible. A true statesman whose life of service has been exemplary. 🙏 pic.twitter.com/5EJh4zvmVC
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) November 8, 2025
‘नेहरू को चीन और इंदिरा को इमरजेंसी से नहीं आंक सकते’
शशि थरूर ने तर्क दिया कि आडवाणी जी की दशकों की सेवा को सिर्फ एक घटना (जैसे 1990 की रथ यात्रा) तक सीमित करना अनुचित है। उन्होंने लिखा, “जैसे नेहरूजी के पूरे राजनीतिक जीवन को सिर्फ चीन के खिलाफ हुए झटके (1962 युद्ध) से नहीं आंका जा सकता, न ही इंदिरा गांधी को केवल इमरजेंसी से परिभाषित किया जा सकता है। उसी तरह की निष्पक्षता आडवाणी जी के साथ भी बरती जानी चाहिए।”
आलोचकों के निशाने पर आए थरूर
आडवाणी की इस तारीफ पर थरूर को सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा। आलोचकों ने उन पर भाजपा नेता की “विभाजनकारी राजनीति” को सफेदी पोतने (Whitewash) का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने पलटवार करते हुए कहा कि “इस देश में नफरत के बीज बोना किसी भी तरह से लोक सेवा नहीं है।”
मुख्य बातें (Key Points):
- शशि थरूर ने लालकृष्ण आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर उनकी तारीफ की और उन्हें “सच्चा राजनेता” बताया।
- थरूर ने कहा कि आडवाणी का मूल्यांकन सिर्फ एक घटना (रथ यात्रा) से नहीं होना चाहिए।
- उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि नेहरू को चीन युद्ध और इंदिरा को इमरजेंसी से परिभाषित नहीं किया जा सकता।
- इस बयान पर थरूर को सोशल मीडिया पर आलोचना झेलनी पड़ी, आलोचकों ने इसे “विभाजनकारी राजनीति को सफेदी पोतना” बताया।








