Bilaspur Train Accident : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। मंगलवार को हुए इस भीषण हादसे के बाद अब ग्राम गतौरा के 6 युवाओं की बहादुरी की मिसाल सामने आई है। ये लड़के बचाव दल के पहुंचने से पहले ही मौके पर पहुंच गए और अपनी जान की परवाह किए बिना कई यात्रियों की जिंदगियां बचा लीं।
हादसे के तुरंत बाद पहुंचे ग्रामीण
यह भीषण हादसा मंगलवार शाम करीब 4 बजे हुआ था, जब गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू (MEMU) पैसेंजर ट्रेन बिलासपुर स्टेशन के पास खड़ी एक मालगाड़ी से जा टकराई थी।
जिस वक्त यह टक्कर हुई, ग्राम गतौरा के सोनू बघेल अपने दोस्तों कमलेश पात्रे, सोदान पात्रे, भैरव निषाद, जितेन्द्र गेन्डले और संतोष के साथ पास में ही थे। उन्होंने ट्रेन को टकराते हुए दूर से ही देख लिया था। ये सभी युवा बिना देर किए तुरंत मौके पर पहुंचे। वहां का मंजर भयावह था, डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे और यात्री अंदर फंसे चीख-पुकार मचा रहे थे।
अपनी जान पर खेलकर बचाई जान
इस अफरातफरी के बीच, सोनू और उनके साथियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए फंसे हुए यात्रियों को मलबे से बाहर निकालना शुरू कर दिया। जिन यात्रियों की हालत गंभीर थी, उन्हें इन लड़कों ने आसपास के निजी वाहनों से तुरंत अस्पताल भिजवाया।
मासूम बच्चे को बचाने की कोशिश
राहत कार्य के दौरान इन युवाओं को एक दो साल का मासूम बच्चा मिला, जो मलबे में फंसा हुआ था। बच्चे के पेट में लोहे का एक बड़ा टुकड़ा धंसा हुआ था। सोनू और उनके दोस्तों ने उसे निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन बिना उपकरणों के वे उसे बाहर नहीं निकाल सके। बाद में जब बचाव दल मौके पर पहुंचा, तब बच्चे को निकाला गया, लेकिन उसकी हालत बेहद नाजुक थी।
सोशल मीडिया से की मदद, कहलाए ‘रियल हीरो’
इन युवाओं ने घायलों की पहचान और उनके परिजनों तक खबर पहुंचाने के लिए अपने मोबाइल फोन से फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किए। उनकी इस कोशिश से कई परिवारों को अपने लोगों की जानकारी मिली।
रेलवे और प्रशासनिक टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लगा, लेकिन तब तक इन 6 दोस्तों ने कई जिंदगियां बचा ली थीं। स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने इन सभी युवाओं के साहस की जमकर सराहना की है। ग्राम गतौरा के ये लड़के आज बिलासपुर रेल हादसे के ‘असली हीरो’ बन गए हैं।
मुख्य बातें (Key Points):
- बिलासपुर रेल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
- बचाव दल से पहले 6 स्थानीय युवा मौके पर पहुंचे और कई यात्रियों की जान बचाई।
- इन युवाओं ने एक 2 साल के फंसे हुए बच्चे को भी निकालने की कोशिश की, जो गंभीर रूप से घायल था।
- सोनू बघेल और उनके दोस्तों को स्थानीय लोग और प्रशासन ‘असली हीरो’ कह रहे हैं।








