चंडीगढ़, 2 नवंबर (The News Air) एसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एएसएपी) ने पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट भंग करने की कड़ी निंदा की है, इसे पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 का सीधा उल्लंघन और पंजाब की संवैधानिक व शैक्षणिक स्वायत्तता पर गंभीर हमला बताया है।
चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, प्रदेश प्रवक्ता वतनवीर सिंह गिल और प्रदेश महासचिव प्रिंस चौधरी ने केंद्र सरकार पर एकतरफा और असंवैधानिक कार्रवाइयों के जरिए पंजाब की अकादमिक स्वतंत्रता को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने घोषणा की कि एएसएपी पंजाब और चंडीगढ़ भर के सहयोगी छात्र संघों और शिक्षक संगठनों के साथ समन्वय बनाकर, केंद्र के फैसले का विरोध करने के लिए एक राज्यव्यापी ‘शैक्षणिक बंद’ अभियान शुरू करेगा। इस आंदोलन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, कैंपस संवाद और पंजाब यूनिवर्सिटी में लोकतांत्रिक शासन व संघीय जवाबदेही को बहाल करने के उद्देश्य से समन्वित संस्थागत कार्रवाइयां शामिल होंगी।
प्रिंस चौधरी ने कहा कि केंद्र का यह कदम सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, यह पंजाब की अकादमिक और सांस्कृतिक पहचान को चुप कराने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के लोग अपने शैक्षणिक संस्थानों पर किसी भी तरह के कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
पंजाब और पंजाब यूनिवर्सिटी के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, वतनवीर सिंह गिल ने घोषणा की कि, “हम पंजाब की शैक्षणिक स्वतंत्रता को खत्म नहीं होने देंगे। यह आंदोलन तब तक निरंतर जारी रहेगा जब तक राज्य और इसके छात्रों की आवाज नहीं सुनी जाती।”
एएसएपी नेताओं ने सभी छात्र और शिक्षक संगठनों से पंजाब यूनिवर्सिटी की अकादमिक संप्रभुता और लोकतांत्रिक भावना की रक्षा के लिए एक साझे झंडे तले एकजुट होने की अपील की।
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