पंजाब विजीलेंस ब्यूरो (Punjab Vigilance Bureau) ने स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (State Bank of Patiala) की सुल्तानपुर लोधी (Sultanpur Lodhi) शाखा में हुए बहु-करोड़ रुपये के घोटाले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सतनाम सिंह और सरबजीत सिंह नंबरदार, दोनों निवासी गांव सरूपवाल (Sarupwal), तहसील सुल्तानपुर लोधी, अब इस मामले में मुख्य आरोपी माने गए हैं।
घोटाले का खुलासा: यह घोटाला सात साल पहले 9 मार्च 2017 को दर्ज एक विजीलेंस जांच के आधार पर सामने आया था। जांच में यह पाया गया कि बैंक के कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर आरोपियों ने बैंक से अवैध तरीके से ऋण प्राप्त किए थे। इस घोटाले के तहत 14 ऋण फाइलों के माध्यम से लगभग 3.71 करोड़ रुपये का गबन किया गया।
घोटाले की विशेषताएँ: आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी रिपोर्टें तैयार कीं और जिन जमीनों पर बैंक ऋण स्वीकृत किया गया था, वह जमीन उन व्यक्तियों की स्वामित्व में नहीं थी। इन आरोपियों ने सरकारी रिकॉर्ड को बदलकर निजी संपत्तियों के रूप में दिखाकर ऋण स्वीकृत करवाए थे।
मुख्य आरोपी की भूमिका: सतनाम सिंह ने कृषि ऋण प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सुलिंदर सिंह (SULINDER SINGH), बैंक प्रबंधक के साथ मिलकर 16 लाख रुपये का ऋण मंजूर करवाया। इस ऋण के लिए राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार कोई आधिकारिक प्रमाणीकरण नहीं था। इस मामले में सर्बजीत सिंह नंबरदार (Sarbijit Singh) भी आरोपी बना है, जिसने गवाही देने में मिलीभगत की थी।
विजीलेंस ब्यूरो की कार्रवाई: पंजाब विजीलेंस ब्यूरो ने अब तक कुल 33 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें से 28 को गिरफ्तार किया जा चुका है। तीन आरोपियों को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। अब विजीलेंस ब्यूरो अन्य बचे हुए आरोपियों की तलाश में जुटा हुआ है।
कानूनी कदम: गिरफ्तार किए गए आरोपियों सतनाम सिंह और सरबजीत सिंह को जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा। इन दोनों आरोपियों से आगे की पूछताछ के लिए रिमांड हासिल किया जाएगा। इस मामले की जांच अब भी जारी है।
यह घोटाला बैंकिंग सेक्टर में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली एक बड़ी घटना है। विजीलेंस ब्यूरो की तेज कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी आरोपी बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले की पूरी जांच सुनिश्चित करेगी कि सभी आरोपियों को सजा मिले और बैंकिंग प्रणाली की ईमानदारी बनाए रखी जाए।








