8th Pay Commission Fitment Factor : आठवें वेतन आयोग को लेकर देशभर के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें एक ही सवाल पर टिकी हैं कि इस बार फिटमेंट फैक्टर कितना होगा? इसी बड़े सवाल पर अब NC-JCM (स्टाफ साइड) के नेता और ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) के जनरल सेक्रेटरी शिव गोपाल मिश्रा ने खुलकर बात की है और कुछ अहम संकेत दिए हैं।
8th Pay Commission की घोषणा के बाद से ही फिटमेंट फैक्टर को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ संगठनों का अनुमान है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2 से लेकर 3.6 के बीच हो सकता है। इन अटकलों के बीच शिव गोपाल मिश्रा का बयान सामने आया है, जो लाखों कर्मचारियों के लिए किसी बड़े अपडेट से कम नहीं है।
‘फिटमेंट फैक्टर पर अभी कुछ भी तय नहीं: शिव गोपाल मिश्रा’
शिव गोपाल मिश्रा ने साफ कहा है कि आधिकारिक तौर पर अभी फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनका कहना है कि फिटमेंट फैक्टर बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इस पर अलग-अलग संगठनों की अलग-अलग राय है। इसीलिए अभी किसी भी संख्या को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे कर्मचारियों में भ्रम फैल सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पहले सभी संगठनों के बीच एकता बनाई जाएगी, उसके बाद एक Common Memorandum तैयार होगा और सरकार के सामने अंतिम प्रस्ताव रखा जाएगा। जब तक यह सहमति नहीं बनती, तब तक कोई आंकड़ा सामने नहीं आएगा।
‘सिर्फ फिटमेंट नहीं, पूरे वेतन ढांचे की बुनियाद बदलेगी’
इस बार की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात यह है कि 8वें वेतन आयोग में केवल फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि पूरे वेतन ढांचे की बुनियाद को बदलने की तैयारी हो रही है। खासतौर पर उस बास्केट में बदलाव की बात हो रही है, जिसके आधार पर महंगाई, मिनिमम वेज और फिटमेंट फैक्टर तय किया जाता है। स्टाफ साइड का तर्क है कि आज के दौर में आम कर्मचारी के खर्च का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है और पुराने आधार पर वेतन गणना करना अब व्यावहारिक नहीं रहा।
‘बदले माहौल में बदलनी होगी वेतन गणना’
स्टाफ साइड का स्पष्ट कहना है कि अगर बदले हुए सामाजिक और आर्थिक माहौल को वेतन गणना में शामिल नहीं किया गया, तो कर्मचारियों को वास्तविक राहत नहीं मिलेगी। इसीलिए इस बार का Memorandum तथ्यों और गणनाओं के ठोस आधार पर तैयार किया जा रहा है, ताकि सरकार के सामने एक मजबूत और तर्कसंगत दलील रखी जा सके।
यह पहली बार है जब कर्मचारी संगठन इतनी सावधानी और योजना के साथ अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। इससे साफ है कि इस बार वेतन वृद्धि की लड़ाई कागजों पर नहीं, बल्कि ठोस डेटा और तथ्यों के आधार पर लड़ी जाएगी।
‘कर्मचारियों को अभी करना होगा इंतजार’
AIRF जनरल सेक्रेटरी का साफ संदेश है कि फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस भले ही जारी हो, लेकिन इस बार 8वें वेतन आयोग में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार कर्मचारी संगठनों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आखिरकार कब तक बढ़ी हुई सैलरी कर्मचारियों के खातों में पहुंचती है।
‘आम कर्मचारी पर क्या पड़ेगा असर?’
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की मासिक आय में बड़ा बदलाव आएगा। फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, सैलरी उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी। ऐसे में यह फैसला सीधे तौर पर लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति पर असर डालेगा।
‘क्या है पूरा मामला?’
8th Pay Commission का गठन केंद्र सरकार ने 2025 में किया था। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक वेतन ₹7000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया था। इस बार कर्मचारी संगठन अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जिससे वेतन में और बड़ी बढ़ोतरी हो सके। आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- 8th Pay Commission में फिटमेंट फैक्टर 2 से 3.6 के बीच होने का अनुमान, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं।
- NC-JCM स्टाफ साइड नेता शिव गोपाल मिश्रा ने कहा, सभी संगठनों में एकता बनने के बाद ही सरकार के सामने Common Memorandum रखा जाएगा।
- इस बार सिर्फ फिटमेंट नहीं, बल्कि पूरे वेतन ढांचे की बुनियाद बदलने की तैयारी है।
- महंगाई और बदले आर्थिक माहौल को ध्यान में रखते हुए तथ्यों पर आधारित Memorandum तैयार किया जा रहा है।








