8th Pay Commission : आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का धैर्य अब जवाब देने लगा है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को कड़ा पत्र लिखकर मांग की है कि आयोग को तुरंत काम शुरू करने का निर्देश दिया जाए और सिर्फ 200 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का टारगेट तय किया जाए। फेडरेशन ने साफ कहा है कि 15 जनवरी 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा हुई थी, लेकिन एक साल से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी आयोग जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं हो सका है।
1 साल बीता, आयोग अभी भी निष्क्रिय
15 जनवरी 2025 को केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। यह घोषणा देशभर के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी थी। हालांकि, घोषणा के एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी आयोग अपना काम शुरू नहीं कर सका है।
यह देरी लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में निराशा और गुस्सा पैदा कर रही है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन वेतन संशोधन की प्रक्रिया फाइलों में अटकी पड़ी है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार ने घोषणा तो कर दी, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा। यह केंद्रीय कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
50 लाख कर्मचारी, 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि देश के 50 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनर्स बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन का इंतजार कर रहे हैं।
खासकर तब जब आयोग की घोषणा को एक साल बीत चुका है और आयोग अब तक अपना काम शुरू नहीं कर सका है। इसके चलते देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है।
यह कर्मचारी विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में काम कर रहे हैं। इनके परिवारों की आजीविका इसी वेतन पर निर्भर करती है।
प्रशासनिक लापरवाही नहीं, कर्मचारियों के साथ अन्याय
डॉ. पटेल ने अपने पत्र में लिखा है कि यह देरी सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ईज ऑफ गवर्नेंस मॉडल की भावना को ठेस पहुंच रही है।
उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि वे आठवें वेतन आयोग को जल्द से जल्द काम शुरू करने के लिए निर्देशित करें। देरी से सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार जब चुनाव के समय कर्मचारियों से वोट मांगती है तो उनके हित की बात करती है, लेकिन जब काम की बारी आती है तो फाइलें अटक जाती हैं।
फेडरेशन की प्रमुख मांगें
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने अपने पत्र में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
आयोग को तुरंत काम शुरू करने का निर्देश: आठवें वेतन आयोग को बिना किसी और देरी के तुरंत अपना काम शुरू करना चाहिए।
200 दिनों में रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य: आयोग को 200 दिनों की समय सीमा में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी चाहिए। यह समय सीमा तय करना जरूरी है ताकि प्रक्रिया में और देरी न हो।
कर्मचारियों और पेंशनर्स को जल्द लाभ: वेतन और पेंशन संशोधन का लाभ कर्मचारियों और पेंशनर्स को जल्द से जल्द मिले। महंगाई के दौर में यह उनके लिए बेहद जरूरी है।
वेतन आयोग में देरी से परिवारों को नुकसान
फेडरेशन का कहना है कि वेतन आयोग की रिपोर्ट में देरी का सीधा नुकसान लाखों परिवारों को उठाना पड़ रहा है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन वेतन संशोधन की प्रक्रिया फाइलों में अटकी पड़ी है।
खाने-पीने की चीजों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास तक सब कुछ महंगा हो गया है। लेकिन कर्मचारियों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। यह स्थिति उनके परिवारों के लिए संकट पैदा कर रही है।
पेंशनर्स की स्थिति और भी खराब है। उनके पास आय का कोई दूसरा जरिया नहीं होता। महंगाई में पेंशन की कीमत और कम हो जाती है।
अब और इंतजार नहीं, मिशन मोड में चले आयोग
साफ शब्दों में कहें तो फेडरेशन ने यह कह दिया है कि अब और इंतजार नहीं। संगठन चाहता है कि सरकार तेजी दिखाए और आठवें वेतन आयोग को मिशन मोड में चलाए।
कर्मचारी संगठनों ने चेताया है कि अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। देशभर के कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर सकते हैं।
हालांकि, संगठन अभी सरकार से बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि वित्त मंत्री उनकी बात सुनेंगी और तुरंत कार्रवाई करेंगी।
7वें वेतन आयोग का अनुभव
सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में हुआ था और उसने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इसे 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया था।
उस समय भी कर्मचारियों को काफी इंतजार करना पड़ा था। लेकिन कम से कम आयोग ने समय पर अपना काम पूरा कर लिया था। अब 8वें वेतन आयोग के मामले में शुरुआत में ही देरी हो रही है, जो चिंताजनक है।
कर्मचारी नहीं चाहते कि 7वें वेतन आयोग जैसा लंबा इंतजार फिर से करना पड़े। इसीलिए वे 200 दिनों में रिपोर्ट देने की मांग कर रहे हैं।
DA में बढ़ोतरी भी जरूरी
वेतन आयोग के अलावा, कर्मचारी महंगाई भत्ते (DA) में भी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। फिलहाल DA में हर छह महीने में संशोधन किया जाता है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी महंगाई की रफ्तार के मुकाबले बहुत कम है।
8वें वेतन आयोग से उम्मीद है कि वह DA की गणना का फार्मूला भी बदलेगा और कर्मचारियों को ज्यादा राहत देगा।
सरकार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं
फेडरेशन के पत्र के बाद अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
कर्मचारी संगठन अब सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कोई सकारात्मक घोषणा होगी और आयोग अपना काम शुरू कर देगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- 15 जनवरी 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा हुई थी
- एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी आयोग सक्रिय नहीं
- एनपीएस फेडरेशन ने वित्त मंत्री को कड़ा पत्र लिखा
- 200 दिनों में रिपोर्ट सौंपने की मांग
- 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स प्रभावित हैं








